सांसदों के शिवसेना में विलय को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट में स्पीकर के पेश न होने पर UBT की याचिका पर सुनवाई स्थगित की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे - UBT) के सदस्य अरविंद गणपत सावंत की याचिका पर सुनवाई दो हफ़्ते के लिए स्थगित की। इस याचिका में लोकसभा स्पीकर के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई, जिसमें उनके छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंज़ूरी दी गई।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने स्पीकर की ओर से किसी के पेश न होने पर मामले की सुनवाई स्थगित की। बेंच ने इससे पहले 22 जुलाई को प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था।
आज (सोमवार), सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल और सिद्धार्थ भटनागर शिंदे गुट के कुछ विधायकों की ओर से पेश हुए। हालाँकि, स्पीकर की ओर से कोई पेश नहीं हुआ।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि अंतरिम राहत की तत्काल ज़रूरत है। हालांकि, बेंच ने कहा कि अंतरिम राहत पर फ़ैसला लेने से पहले वह प्रतिवादियों को समय देगी। याचिकाकर्ता की ओर से ही पेश सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने कहा कि प्रतिवादियों की कोशिश संसद के चल रहे मॉनसून सत्र को किसी तरह गुज़ारने की।
सिब्बल ने तर्क दिया कि जब सांसदों के ख़िलाफ़ अयोग्यता की कोई याचिका दायर नहीं की गई तो स्पीकर के पास विलय को मंज़ूरी देने वाला आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं है। स्पीकर विलय को मंज़ूरी देने का आदेश तभी पारित कर सकते हैं, जब वे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दायर किसी आवेदन को खारिज कर रहे हों।
सिब्बल ने कहा,
"सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों से यह बात साफ़ है कि स्पीकर 10वीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत मामले का फ़ैसला तभी कर सकते हैं, जब अयोग्यता के आवेदन के बचाव में ऐसा किया जा रहा हो। उनके पास कोई असीमित अधिकार नहीं हो सकते।"
सिब्बल ने यह भी कहा कि स्पीकर ने UBT पक्ष को अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया।
हालांकि, बेंच ने गौर किया कि स्पीकर और लोकसभा के संयुक्त सचिव की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। सिब्बल ने बताया कि उन्हें नोटिस भेजा गया।
22 जुलाई को, जब मामले की पिछली बार सुनवाई हुई, तो बेंच ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस जारी किया था, लेकिन विलय के आदेश पर रोक लगाने या कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। कथित तौर पर संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने छह शिव सेना यूबीटी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में विलय को मंजूरी दी।
सांसद हैं संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट), नागेश पाटिल-आष्टिकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिम्बलकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)। विलय के बाद लोकसभा में UTB के सांसदों की संख्या घटकर तीन हो गई, जबकि शिंदे सेना के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।
Case Details: ARVIND GANPAT SAWANT v HONBLE SPEAKER, LOK SABHA AND ORS.|W.P.(C) No. 886/2026