सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव के नतीजों पर छह उम्मीदवारों ने उठाए सवाल, मतपत्रों की दोबारा गिनती की मांग
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य पद के चुनाव परिणाम को छह उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उम्मीदवारों ने मतगणना में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मतपत्रों की दोबारा गिनती कराने की मांग की।
यह अंतरिम आवेदन स्मृति कुमारी, श्वेता सिन्हा, शैला चौधरी, सुंदरी, सचिन पाहवा और कृष्ण कुमार गुप्ता की ओर से दाखिल किया गया। आवेदन अधिवक्ता अभिलेख विपिन गुप्ता के माध्यम से दायर किया गया।
आवेदन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का चुनाव तय नियमों के अनुसार कराया गया। इसके लिए चुनाव समिति का गठन किया गया और कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए सभी आवेदकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन सही पाए गए और उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई।
चुनाव के लिए 18 अगस्त 2026 को मतदान हुआ था। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मानद सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पदों की मतगणना उसी दिन पूरी हो गई थी। हालांकि, कार्यकारिणी सदस्य पद की मतगणना 19 अगस्त की शाम शुरू हुई और 20 अगस्त तक चलती रही। इसके बाद 21 अगस्त को परिणाम घोषित किए गए।
छह उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि कार्यकारिणी सदस्य पद की मतगणना के दौरान कुछ उम्मीदवारों के कहने पर नियुक्त स्वयंसेवकों ने अनुचित तरीके अपनाए। आवेदन में दावा किया गया कि हर दौर की मतगणना के बाद कुछ उम्मीदवारों के मतों की संख्या गलत तरीके से बढ़ाई गई, जबकि आवेदकों के मत कम बताए गए।
आवेदन में कहा गया कि कथित गड़बड़ी के कारण स्वयंसेवकों से जुड़े उम्मीदवारों के मतों में काफी बढ़ोतरी हुई और आवेदकों के मत कम हो गए।
उम्मीदवारों का आरोप है कि उन्होंने मतगणना के दौरान ही चुनाव समिति के सामने इन अनियमितताओं की शिकायत की थी।
श्वेता सिन्हा की ओर से 20 अगस्त को दी गई पहली शिकायत में कहा गया कि हर दौर पूरा होने के बाद उनके मिले मतों की संख्या बताई जाती थी, लेकिन बाद में कुल संख्या में अंतर सामने आता था। उन्होंने कहा कि इस अंतर की जानकारी चुनाव समिति को मौखिक रूप से भी दी गई, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
21 अगस्त को कई उम्मीदवारों ने मिलकर दूसरी शिकायत भी दी। इसमें आरोप लगाया गया कि कुछ उम्मीदवारों के पक्ष में सक्रिय रूप से प्रचार करने वाले अधिवक्ताओं को भी मतगणना के दौरान स्वयंसेवक के रूप में काम करने की अनुमति दी गई।
शिकायत में मतों की गिनती के तरीके में बदलाव, कुछ खाली मतपत्रों का हिसाब नहीं मिलने, पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और मतों में कथित हेरफेर से जुड़ी शिकायत को दबाने जैसे आरोप भी लगाए गए। उम्मीदवारों ने यह भी आरोप लगाया कि मतगणना जल्दबाजी में पूरी की गई।
आवेदन के मुताबिक, इन शिकायतों के बावजूद चुनाव समिति ने उम्मीदवारों की आपत्तियों पर न तो कोई जवाब दिया और न ही उनका समाधान किया। इसके बजाय 21 अगस्त को करीब शाम 4 बजे जल्दबाजी में चुनाव परिणाम घोषित कर दिया गया।
छह उम्मीदवारों ने यह भी बताया है कि कार्यकारिणी सदस्य पद पर निर्वाचित अंतिम उम्मीदवार को 436 मत मिले। उनका कहना है कि यदि मतों की निष्पक्ष तरीके से गिनती की गई तो उनके निर्वाचित होने की पूरी संभावना थी।.आवेदन में कहा गया कि चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है। उम्मीदवारों ने चुनाव समिति की ओर से शिकायतों पर कथित चुप्पी और निष्क्रियता पर भी सवाल उठाया है।
छह उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट से कार्यकारिणी सदस्य पद के चुनाव परिणाम को रद्द कर शून्य घोषित करने की मांग की। साथ ही सभी मतपत्रों की दोबारा गिनती कराने और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन तथा चुनाव समिति को पुनर्मतगणना कराने का निर्देश देने की मांग की गई।