हवाई किराए तय करने के नियम फाइनल, दो हफ्ते में जारी होंगे: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवाई किराए को नियंत्रित करने वाले नियम फाइनल कर लिए गए और इन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल गई। ये नियम दो हफ्ते के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस अपारेश सिंह की बेंच एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका निजी एयरलाइनों द्वारा मनमाने और बहुत ज्यादा हवाई किराए वसूलने के खिलाफ है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि नियम फाइनल हो चुके हैं और इन्हें जारी करने के लिए प्रशासनिक मंजूरी मिल गई।
इस जानकारी पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले को 16 नवंबर को सुनवाई के लिए रखा जाए। तब तक, जारी किए गए नियमों को कोर्ट के सामने पेश करना होगा।
ये नियम हवाई किराए में अचानक और अप्रत्याशित बढ़ोतरी (खासकर ज्यादा मांग वाले समय में) और हवाई यात्रियों से वसूले जाने वाले अत्यधिक शुल्कों को लेकर जताई गई चिंताओं के मद्देनजर बनाए गए।
सीनियर वकील रवींद्र श्रीवास्तव ने नियम बनाने में हुई देरी पर सवाल उठाया और बताया कि इस साल दिवाली से पहले भी यही समस्याएं सामने आई थीं।
17 अगस्त को केंद्र सरकार ने प्रस्तावित नियमों का एक ड्राफ्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा था।
कोर्ट ने ड्राफ्ट को देखा और उसे वापस सरकार को सौंप दिया। उस समय केंद्र ने नियमों को फाइनल करने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा। माना जा रहा है कि इन नियमों में जनहित याचिका में उठाई गई चिंताओं को शामिल किया जाएगा, जिनमें हवाई किराया, 'सर्ज प्राइसिंग' (मांग बढ़ने पर किराया बढ़ना) और ज्यादा सामान (एक्सेस बैगेज) के लिए लगने वाले शुल्क शामिल हैं।
याचिका में एल्गोरिदम पर आधारित 'डायनेमिक प्राइसिंग', कम समय के नोटिस पर टिकट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और यात्रियों पर पड़ने वाले एयरलाइन शुल्कों को लेकर चिंता जताई गई। इसमें मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा को 25 किलो से घटाकर 15 किलो करने पर भी सवाल उठाया गया।
याचिकाकर्ता ने मांग की कि हवाई किराए को उचित और पारदर्शी बनाने के लिए रेगुलेटर दखल दें, ताकि यात्रियों को अत्यधिक शुल्कों से बचाया जा सके।
इससे पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और ज्यादा मांग वाले समय (जैसे महाकुंभ के दौरान) में हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए इस मामले में दखल देने का फैसला किया।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील रवींद्र श्रीवास्तव और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड चारु माथुर पेश हुए।
Case Title : S. Laxminarayanan v. Union of India