राज्यसभा सांसद और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.ए. रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें 11 अक्टूबर को नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान DYFI के पदाधिकारियों, केंद्रीय समिति के सदस्यों और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और हिरासत में प्रताड़ित करने की स्वतंत्र जांच की मांग की गई।

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों को जबरन पर्दे वाली खिड़कियों वाली पुलिस गाड़ियों में ले जाया गया, हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें सात घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया। इस दौरान न तो गिरफ्तारी मेमो जारी किया गया, न ही उनके रिश्तेदारों को सूचना दी गई, न ही हिरासत में मेडिकल जांच हुई और न ही उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

याचिका के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को सूरजमल स्टेडियम ले जाया गया और हिरासत में लिए जाने के लगभग सात घंटे बाद शाम करीब 7:30 बजे रिहा कर दिया गया। याचिका में आरोप है कि कोई गिरफ्तारी मेमो तैयार नहीं किया गया, रिश्तेदारों को सूचित नहीं किया गया और हिरासत में लिए गए लोगों को न तो मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और न ही कानून के अनुसार उनकी मेडिकल जांच की गई।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों की मेडिको-लीगल जांच के दौरान सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें डॉक्टरों से खुलकर बात करने से रोका।

याचिका में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्टूबर के निर्देशों का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया:

"कोई गैर-कानूनी हिरासत नहीं होगी, खासकर उन मामलों में जहां लोग शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के उस इलाके के बाहर इकट्ठा होते हैं, जहां BNSS की धारा 163 लागू है।"

इसमें संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है और डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले और व्यक्तिगत स्वतंत्रता व हिरासत से जुड़े सुरक्षा उपायों पर आधारित अन्य फैसलों का हवाला दिया गया।

जांच और सबूत सुरक्षित रखने की मांग

याचिकाकर्ता ने कथित घटना की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और CCTV फुटेज, GPS डेटा, वाहन आवाजाही के रिकॉर्ड और पुलिस ड्यूटी रोस्टर को सुरक्षित रखने की मांग की। याचिका में यह भी मांग की गई कि पर्दों वाली या अलग-अलग हिस्सों में बंटी गाड़ियों का इस्तेमाल हिरासत की जगह के तौर पर या हिरासत में लिए गए लोगों को अज्ञात जगहों पर ले जाने के लिए न किया जाए। इसमें ऐसी बाध्यकारी गाइडलाइंस की मांग की गई, जिनसे विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी गिरफ्तारियों में पारदर्शिता हो, पुलिसकर्मियों की पहचान साफ ​​दिखे, वकीलों और रिश्तेदारों से मिलने की सुविधा हो और हिरासत में ली गई महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

याचिका में घायल प्रदर्शनकारियों की स्वतंत्र मेडिकल जांच की भी मांग की गई है, जिसमें पुलिसकर्मी मौजूद न हों।

मांगी गई राहतें

याचिका में निम्नलिखित राहतें मांगी गईं:

"1) एक रिट, आदेश या निर्देश जारी किया जाए जिसमें 11.10.2026 को कनॉट प्लेस में DYFI के सदस्यों, पदाधिकारियों और केंद्रीय समिति के सदस्यों की हिरासत को गैर-कानूनी और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(d), 21 और 22 का उल्लंघन घोषित किया जाए।

2) एक रिट, आदेश या निर्देश जारी किया जाए जिसमें यह घोषित किया जाए कि पर्दों वाली, अलग-अलग हिस्सों में बंटी या सील की गई गाड़ियों का इस्तेमाल हिरासत की जगह के तौर पर करना, या हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस स्टेशन या हिरासत के लिए अधिसूचित जगह के अलावा किसी अन्य जगह पर ले जाना असंवैधानिक है, और प्रतिवादियों को ऐसे इस्तेमाल से रोका जाए।

3) प्रतिवादियों को आदेश या निर्देश जारी करें कि वे तुरंत हिरासत में यातना, शारीरिक हमले, क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार, और प्रदर्शनकारियों व अन्य लोगों की गैर-कानूनी हिरासत जैसी सभी गतिविधियों को रोकें और उनसे बचें; साथ ही गिरफ्तारी, हिरासत, पूछताछ और हिरासत के दौरान व्यवहार से जुड़े संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

4) गैर-कानूनी हिरासत और हिरासत में यातना की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच का आदेश दें, जिसमें 11.10.2026 को कनॉट प्लेस में DYFI के सदस्यों, पदाधिकारियों और केंद्रीय समिति के सदस्यों को हिरासत में लेने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश भी शामिल हो।

5) प्रतिवादियों को निर्देश दें कि वे तुरंत कनॉट प्लेस और दरियागंज रेस्तरां के आसपास के इलाके का CCTV फुटेज, बस और अलग-अलग हिस्सों वाली गाड़ियों (compartmentalised vehicles) का GPS और मूवमेंट लॉग, PCR और वायरलेस लॉग, वाहन लॉगबुक और 11.10.2026 के लिए ड्यूटी रोस्टर सुरक्षित रखें और इस माननीय अदालत के सामने पेश करें।

6) प्रतिवादी संख्या 3, 4 और 6 को निर्देश दें कि वे दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और किसी भी अन्य बल के उन सभी कर्मियों की पहचान करें (नाम, पद और यूनिट के साथ) जिन्होंने 11.10.2026 को DYFI के सदस्यों को हिरासत में लिया था। यह निर्देश दें कि विरोध प्रदर्शन की ड्यूटी पर तैनात हर बल के कर्मी डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) 1 SCC 416 और BNSS की धारा 36(a) के अनुसार सही, दिखाई देने वाले और स्पष्ट पहचान और नाम वाले टैग (पद के साथ) लगाएं।

7) प्रतिवादी संख्या 1 को निर्देश दें कि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत से संबंधित दिशानिर्देश बनाएं और अधिसूचित करें, जिनमें अन्य बातों के अलावा यह प्रावधान हो कि (i) हिरासत में लिए गए लोगों को केवल पुलिस स्टेशन या हिरासत के लिए अधिसूचित जगह पर ही ले जाया जाएगा; (ii) हिरासत में लिए गए लोगों को रखने या ले जाने के लिए ऐसी किसी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा जिसकी खिड़कियां ढकी हुई, पर्दे वाली या काली (blacked-out) हों; (iii) हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हर गाड़ी में CCTV लगा हो और साथ में बॉडी कैमरा पहने हुए अधिकारी हों; (iv) BNSS की धारा 43(5) के तहत हिरासत में ली गई महिलाओं से सिर्फ़ महिला अधिकारी ही निपटेंगी; (v) हिरासत में लिए गए लोगों को वकीलों और रिश्तेदारों से मिलने की सुविधा होगी; (vi) तैनात सभी कर्मचारियों को अपना नाम और पद साफ़-साफ़ दिखाने वाले टैग पहनने होंगे; (vii) डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, (1997) 1 SCC 416 मामले में तय किए गए नियमों का पालन विरोध-प्रदर्शन की ड्यूटी पर तैनात हर फ़ोर्स के कर्मचारियों को करना होगा, जिसमें सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स भी शामिल है; और, जब तक ये गाइडलाइंस नहीं आ जातीं, तब तक इसी तरह के अंतरिम निर्देश जारी किए जाएं।"

यह याचिका वकील अनिरुद्ध केपी और फ़िडल टॉम ने तैयार की और इसे एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुभाष चंद्रन के.आ. के ज़रिए दायर किया गया। साथ ही, इसमें तुरंत अंतरिम निर्देश जारी करने की मांग वाली एक अर्ज़ी भी दी गई।

Case Title : A.A. RAHIM VERSUS UNION OF INDIA & ORS.

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