एक रिट याचिका दायर करके 11 अक्टूबर के उस स्टैंडिंग ऑर्डर को चुनौती दी गई, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया और तीन वैकल्पिक जगहों को नोटिफाई किया गया।

यह याचिका वकील स्वाति सिंह ने दायर की। उनका तर्क है कि विरोध-प्रदर्शनों को दूर-दराज के इलाकों में ले जाने से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मौलिक अधिकार बेअसर हो सकते हैं।

याचिका में कहा गया,

"विरोध-प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ़ किसी तय जगह पर इकट्ठा होने का अधिकार नहीं है; यह अपनी शिकायतें बताने, असहमति ज़ाहिर करने और सरकारी अधिकारियों व समाज का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचने का अधिकार है, जिन पर कार्रवाई की ज़रूरत है। इसलिए, विरोध-प्रदर्शन की जगह कोई मामूली प्रशासनिक बात नहीं है। संबंधित संस्थानों से उसकी नज़दीकी, जनता की पहुँच और जिन लोगों तक बात पहुंचानी है, उनकी नज़र में उसका होना, सीधे तौर पर उसके असर को प्रभावित कर सकता है।"

याचिकाकर्ता ने 'मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018)' मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि यह कार्रवाई मनमानी और प्रक्रिया के लिहाज़ से अधूरी है। खासकर इसलिए क्योंकि नई तय जगहों के लिए संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अभी जारी नहीं किए गए, जिससे विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल करने का तरीका अनिश्चित और अधूरा रह गया।

कहा गया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों की योजना हमेशा पहले से नहीं बनाई जा सकती, क्योंकि सरकार के किसी अचानक फैसले वगैरह के जवाब में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो सकता है। इसलिए नई जगहों तक पहुँचने के लिए SOP को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

आगे कहा गया,

"इस स्टैंडिंग ऑर्डर को इस आधार पर भी चुनौती दी जा सकती है कि यह जंतर-मंतर को तुरंत प्रशासनिक असर के साथ डी-नोटिफाई करता है, जबकि तीन तय जगहों के लिए विस्तृत और संशोधित SOP अलग से जारी किए जाने हैं। नतीजतन, यह स्टैंडिंग ऑर्डर नई जगहों तक पहुँचने के लिए कोई पूरा तरीका बताए बिना ही मौजूदा व्यवस्था को बदल देता है। किसी मौजूदा जगह को हटाने वाले नोटिफिकेशन को सिर्फ़ इसलिए विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को बनाए रखने वाला नहीं माना जा सकता कि वैकल्पिक जगहें तय कर ली गई हैं, खासकर तब जब उन जगहों तक पहुँचने के लिए विस्तृत इंतज़ाम बाद में आने वाले SOP पर छोड़ दिए गए हों।"

यह याचिका लक्ष्य सैनी, एडवोकेट तुषार गुप्ता और स्वाति सिंह ने दायर की है और इस पर सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता और एडवोकेट नंदिता राव बहस करेंगी।

Case Title : SWATY SINGH VS UNION OF INDIA

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