पटना हाईकोर्ट मेंं दो सप्ताह के लिए 'प्रायोगिक आधार' पर फिजिकल मोड में काम शुरू होगा, एसओपी जारी

Update: 2021-01-04 03:30 GMT

पटना हाईकोर्ट ने सोशल डिस्टेंसिंग मानदंडों का पालन करते हुए 4.1.2021 से 15.1.2021 तक 'प्रायोगिक आधार' पर फिजिकल मोड में काम शुरू करने का फैसला किया है।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने मंगलवार (29 दिसंबर) को चीफ जस्टिस के आदेश से इस आशय का नोटिस जारी किया है।

नोटिस में कहा गया है ,

"COVID-19 महामारी के कारण, शुरू में ई-मेंशन, ई-फाइलिंग, लिस्टिंग अपलोड करने और वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई के लिए एक प्रक्रिया अपनाई गई थी । इसके बाद स्टूडियो आधारित अदालतों की स्थापना अदालतों के अंदर की गई, जो उन हितधारकों तक पहुंच प्रदान करते थे जिनके पास सभी के लिए न्याय तक निरंतर पहुंच प्रदान करने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचा नहीं था । इस प्रकार, अदालतें दोनों मोड के माध्यम से काम कर रही थीं।"

इसमें आगे कहा गया है कि अब सक्षम प्राधिकारी ने निर्णय लिया है कि न्यायालय फिजिकल मोड में विशुद्ध रूप से "प्रायोगिक आधार" पर दो सप्ताह यानी 4.1.2021 से 15.1.2021 तक काम करना शुरू कर देगा।

न्यायालय परिसर के भीतर सभी हितधारकों की भौतिक उपस्थिति अदालत के कामकाज के लिए अपनाई गई मानक संंचालन प्रक्रिया (एसओपी) में निहित सामान्य निर्देशों द्वारा निर्देशित की जाएगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जहां आपराधिक मामलों की सुनवाई सोमवार, मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को होगी, वहीं गुरुवार को दीवानी मामलों की सुनवाई होगी ।

फुटफॉल को कम करने के लिए, प्रत्येक पीठ के समक्ष केवल 25 मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा; हालांकि, बेंच फिजिकल मोड के सत्र के अलावा सत्र में वर्चुअल मोड के माध्यम से इस मामले में सभी हितधारकों की सुविधा के अनुसार अन्य मामलों को ले सकते हैं ।

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी)

वकील/सहायक वकील/पंजीकृत लिपिक/पक्षकार, जिन्हें ई-पास जारी किए गए हैं, उन्हेंं स्वयं को थर्मल और ऐसे अन्य स्कैनिंग डिवाइस से गुज़रने के बाद निर्धारित द्वारों के माध्यम से न्यायालय परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी, जो कि शरीर के तापमान, संक्रमण की स्थिति आदि का पता लगाने के लिए स्थापित किया गया है।

ई-पास पटना हाईकोर्ट की वेबसाइट से सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश होने वाले अधिवक्ताओं द्वारा मामले का ब्योरा उपलब्ध कराकर ई-पास जनरेट किया जा सकता है।

ई-पास केवल उस विशेष दिन और समय स्लॉट के लिए मान्य होगा जिसके लिए इसे जारी किया जाता है।

फ्लू, बुखार, खांसी आदि के लक्षण वाले लोगों को अदालत परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी ।

वकील/सहायक वकील/पंजीकृत लिपिक को दिन के लिए सूचीबद्ध ऐसे किसी भी मामले के लिए प्रवेश की अनुमति दी जाती है, किसी अन्य व्यक्ति को, उसी मामले के लिए और एक ही पक्ष के लिए, न्यायालय परिसर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी ।

प्रत्येक न्यायालय कक्ष में सीटें न्यूनतम न्यूनतम तक सीमित होंगी और न्यायालय में प्रवेश की अनुमति उन अधिवक्ताओं/पक्ष-व्यक्ति को दी जाएगी जिनके मामले को सुनवाई के लिए बुलाया जाता है  ।

शेष अधिवक्ताओं को सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए अपनी बारी के लिए निर्धारित क्षेत्र/प्रतीक्षालय में प्रतीक्षा करनी होगी ।

एसओपी में कहा गया है कि हाईकोर्ट परिसर में स्थित बैरिस्टर एसोसिएशन, वकील संघ, एडवोकेट एसोसिएशन, अन्य सभी एसोसिएशन, एडवोकेट लाइब्रेरी और कैंटीन अगले आदेश तक बंद रहेंगे।

अधिसूचना डाउनलोड करेंं



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