पालघर लिंचिंग : सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी 

Update: 2020-05-01 12:00 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पालघर में दो साधुओं की लिंचिंग और परिणामस्वरूप मौत की जांच के संबंध में महाराष्ट्र सरकार से स्टेटस  रिपोर्ट मांगी है। 

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने अदालत की निगरानी में जांच और / या इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को हस्तांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दो संतों की लिंचिंग में पुलिस की मिलीभगत थी।

चल रही जांच पर रोक से इनकार करते हुए, अदालत ने याचिकाकर्ता, वकील शशांक शेखर झा को उसकी एक प्रति महाराष्ट्र राज्य को देने के लिए कहा और 4 सप्ताह के बाद मामले को सूचीबद्ध किया।

शुरुआत में, याचिकाकर्ता ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ये कानून और व्यवस्था का ब्रेकडाउन है, क्योंकि पुलिस इसमें मिली हुई थी और प्रशासन ने इस भयावह घटना को रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि

"मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि पुलिस इस घटना में शामिल थी। उन्होंने इसे रोकने के लिए उपलब्ध किसी भी शक्ति का उपयोग नहीं किया था। यह लॉकडाउन के दौरान प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।"

याचिकाकर्ता ने यह भी सवाल उठाया कि पुलिस ने पहली जगह पर भीड़ को इकट्ठा करने की अनुमति कैसे दी, क्योंकि यह लॉकडाउन के नियमों का पूर्ण उल्लंघन है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र के लिए पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि केंद्रीय जांच विभाग (CID) इस मामले की जांच कर रहा है जो कि महाराष्ट्र के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के अंतर्गत आता है।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल को, मुंबई से सूरत जाने वाले दो साधुओं की कार को 200 से अधिक लोगों की भीड़ द्वारा रोका गया था। इस भीड़ ने कार पर हमला कर दिया और पत्थर व डंडों से हमला किया जिसके परिणामस्वरूप दोनों संतों की मृत्यु हो गई।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी तरह की CBI / SIT से अपराध की जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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