सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश करने के लिए पेज लिमिट होना आवश्यक : जस्टिस रवींद्र भट

Update: 2022-09-02 02:26 GMT

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस रवींद्र भट ने गुरुवार को अदालत के समक्ष की गई लंबी लिखित दलीलों पर चिंता व्यक्त की।

जस्टिस रवींद्र भट ने सभी उच्च न्यायालयों द्वारा एक समान न्यायिक संहिता का पालन करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वकीलों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपनी लिखित दलीलों की लंबाई में कटौती करें।

उन्होंने कहा,

"यदि आप मुझसे पूछते हैं कि तत्काल क्या करने की आवश्यकता है तो यह लंबी दलीलों में कटौती करना होगा।

आप सभी दलीलें पेश करते हैं, यह ए से जेड नहीं है, कभी-कभी यह जेडजेडजेड है। आपको इस प्रवृत्ति को कम करना होगा।

जस्टिस रवींद्र भट ने लिखित लंबी दलीलों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अदालत में दायर किसी भी विशेष अनुमति याचिका पर एक पेज की लिमिट हो सकती है।

उन्होंने कहा कि-

"आगे बढ़ते हुए क्या हम एसएलपी के लिए एक पेज की सीमा पर सहमत हो सकते हैं? तारीखों की सूची चार पेज से अधिक नहीं होनी चाहिए। सिनॉप्सिस तीन पैरा से अधिक नहीं होना चाहिए। क्या हम न्यायिक आदेश दे सकते हैं?"

भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और जस्टिस भट की पीठ ने जनहित याचिका के संबंध में यह कहते हुए इस पर विचार करने से इनकार कर दिया कि यह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत तय किया जाने वाला मामला नहीं है।

Tags:    

Similar News