सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा दिल्ली पुलिस को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( NSA) के तहत कार्रवाही करने की शक्ति को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा,

"हम इस मामले में दखल कैसे दे सकते हैं। आजकल CAA के विरोध में जारी प्रदर्शनों में कैसे सार्वजनिक संपत्ति को जलाया जा रहा है। क्या हम इन हालात में प्राधिकरण के हाथ बांध सकते हैं।"

पीठ ने त्रिपुरा, असम और कोलकाता आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कानून और व्यवस्था के मुद्दे हैं और कोर्ट कैसे हस्तक्षेप कर सकता है।

" हम एक सामान्य दिशा नहीं पारित कर सकते हैं, NSA को रोकने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता।"

पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि अधिकारियों द्वारा NSA के दुरुपयोग के अलग-अलग मामलों को अदालत के ध्यान में लाया जाता है तो अदालत निश्चित रूप से कुछ कर सकती है।

पीठ ने कहा, 

" आप हमें बता रहे हैं कि सरकार किसी को गिरफ्तार करने के लिए एक निर्देश जारी नहीं कर सकती है। हम वह कैसे कर सकते है? याचिका वापस लें और हम आपको अधिकार के दुरुपयोग के व्यक्तिगत मामलों का हवाला देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता देते हैं लेकिन इस तरह नहीं।"

दरअसल एक अधिसूचना में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा 3 की उपधारा (3) का इस्तेमाल करते हुए 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया है।  ये अधिसूचना उप राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद 10 जनवरी को जारी की गई थी। इसे  वकील  मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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