सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि किसी आरोपी के ख़िलाफ़ "कोई सख़्त कार्रवाई न करने" का अंतरिम आदेश, जांच अधिकारी को जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल करने से नहीं रोकता।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी को दी गई अंतरिम सुरक्षा का मकसद सिर्फ़ अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) चाहने वाले व्यक्ति की आज़ादी की रक्षा करना है, न कि चार्जशीट दाखिल करने में कोई रुकावट डालना।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,

"...अग्रिम ज़मानत के मामले में इस कोर्ट द्वारा दी गई किसी भी अंतरिम सुरक्षा का यह मतलब नहीं है कि जांच पूरी होने पर अगर चार्जशीट दाखिल करने की ज़रूरत पड़ती है, तो उस पर भी रोक लग जाएगी। दूसरे शब्दों में, एक बार जांच पूरी हो जाने और चार्जशीट दाखिल करने की स्थिति आने पर जांच अधिकारी (I.O.) कानून के अनुसार ऐसा करने के लिए हमेशा स्वतंत्र है। अग्रिम ज़मानत के मामले पर विचार के दौरान किसी भी कोर्ट द्वारा दिया गया अंतरिम आदेश केवल यह बताता है कि अग्रिम ज़मानत चाहने वाले व्यक्ति की आज़ादी सुरक्षित है।"

बेंच एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता को गिरफ़्तारी से बचाने के लिए अंतरिम आदेश दिया गया। राज्य ने बताया कि जांच अभी भी चल रही है और याचिकाकर्ता जांच में सहयोग कर रहा है।

मामले की सुनवाई टालते हुए कोर्ट ने यह साफ़ किया कि आरोपी को अंतरिम सुरक्षा देने का मतलब यह नहीं है कि अंतरिम सुरक्षा लागू रहने के दौरान चार्जशीट दाखिल करने पर रोक होगी। कोर्ट के अनुसार, "अंतरिम आदेश का मतलब होगा कि याचिकाकर्ता की गिरफ़्तारी नहीं की जाएगी", लेकिन यह पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने से नहीं रोकेगा, जो जांच जारी रखे हुए है और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों के आधार पर कार्रवाई कर रही है।

गौरतलब है कि सतीश कुमार रवि बनाम झारखंड राज्य और अन्य (2024 LiveLaw (SC) 943) मामले में एक अलग लेकिन संबंधित मामले में एक समान स्तर की बेंच ने इसके विपरीत राय दी थी। उस मामले में कोर्ट ने उन पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच की थी जिन्होंने याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न करने के अंतरिम आदेश के बावजूद चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस अधिकारियों की माफ़ी को रिकॉर्ड पर लेने के बाद उन्हें अवमानना ​​की कार्यवाही से बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब कोर्ट किसी आपराधिक मामले में आरोपी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने से राज्य को रोकने का अंतरिम आदेश दे देता है, तो उसके बाद चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती।

Cause Title: ARUN KUMAR MANDAL @ ARUN MANDAL VERSUS THE STATE OF JHARKHAND

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