NEET-UG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NEET री-एग्जाम के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट की मांग ठुकराई

Update: 2026-06-01 10:19 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NTA को यह निर्देश देने से इनकार किया कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET)-UG 2026 का री-टेस्ट, जो 21 जून को होना है, मौजूदा पेन-एंड-पेपर फॉर्मेट के बजाय कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड से कराया जाए।

यह राहत देने में अनिच्छा जताते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने मामले को जुलाई तक के लिए टाल दिया, जिससे NEET री-टेस्ट के लिए मांगी गई राहत प्रभावी रूप से खारिज हो गई।

बेंच RJD सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें NEET परीक्षा के संबंध में कई तरह की राहतें मांगी गई थीं। सोमवार को याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वह केवल उस मांग पर ज़ोर दे रहे हैं जिसमें री-एग्जाम CBT मोड में कराने की बात कही गई।

वकील ने कहा,

"आज मैं किसी और मांग पर ज़ोर नहीं दे रहा हूँ। यह CBT मोड में ही होना चाहिए।"

हालांकि, जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी की कि कोर्ट पहले भी इसी तरह की याचिकाओं को खारिज कर चुका है।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा,

"हमने पहले भी इसी तरह के मामले खारिज किए हैं।"

इसके जवाब में वकील ने कहा कि अधिकारी 21 जून को होने वाले री-टेस्ट के लिए परीक्षा प्रक्रिया को फिजिकल आधार पर ही आगे बढ़ा रहे हैं।

हालांकि, बेंच ने परीक्षा कराने वाले अधिकारियों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर इशारा किया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि इस चरण पर ऐसी कोई भी राहत देने का "कोई सवाल ही नहीं उठता," और साथ ही यह भी जोड़ा कि अधिकारी पहले से ही काफी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा,

"आप जानते हैं कि हमें किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा रद्द हो गई और अब इसे दोबारा कराया जा रहा है।"

जज ने आगे उन दबावों का भी ज़िक्र किया, जिनके बीच अधिकारी काम कर रहे हैं। इस बात को दोहराया कि इसी तरह की याचिकाएँ पहले भी खारिज की जा चुकी हैं।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा,

"अधिकारियों पर जिस तरह का दबाव है, उसे देखते हुए हमने इसी तरह के अन्य मामले भी पहले खारिज किए।"

जब वकील ने फिर से कहा कि वह केवल CBT से जुड़ी मांग पर ही ज़ोर दे रहे हैं तो बेंच ने संकेत दिया कि वह इस मामले पर तुरंत सुनवाई नहीं करेगी।

"हम इसे छुट्टियों के बाद देखेंगे," जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, और मामले की सुनवाई टाल दी।

इस याचिका को उन अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया गया है, जिनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधारों की मांग की गई। पिछले महीने जस्टिस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाओं के एक और समूह की सुनवाई करते हुए NEET-UG परीक्षा रद्द होने पर गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की थी। बेंच ने केंद्र सरकार और NTA से उन कदमों पर रिपोर्ट मांगी थी, जो कोर्ट द्वारा पहले नियुक्त एक समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली को मज़बूत करने के लिए उठाए गए।

यह याचिका 3 मई को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने के बाद दायर की गई। परीक्षा रद्द होने का कारण बड़े पैमाने पर पेपर लीक का पता चलना था।

याचिका में नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) [NEET-UG] के आयोजन में व्यापक सुधारों की मांग की गई थी। इसमें यह निर्देश भी शामिल था कि परीक्षा मौजूदा पेन-एंड-पेपर फ़ॉर्मेट के बजाय कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड के ज़रिए आयोजित की जाए।

इसमें NEET-UG को पूरी तरह से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली में बदलने के लिए एक समय-सीमा वाला रोडमैप भी मांगा गया। इस रोडमैप में बुनियादी ढांचे के विकास, परीक्षा केंद्रों, साइबर सुरक्षा उपायों और उम्मीदवारों के लिए पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों का विवरण शामिल होना चाहिए।

याचिका में परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों की भी मांग की गई। मांगी गई राहतों में से एक यह निर्देश था कि केंद्र सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जगह एक स्वतंत्र वैधानिक 'राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण' (National Examination Authority) का गठन करे। यह प्राधिकरण तकनीकी सुरक्षा उपायों, संस्थागत जवाबदेही और निगरानी तंत्र से लैस होना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने आगे एक उच्च-स्तरीय निगरानी समिति के गठन की भी मांग की। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, फोरेंसिक साइंस और प्रशासनिक विशेषज्ञ शामिल होने चाहिए। इस समिति का उद्देश्य सुरक्षित राष्ट्रीय-स्तरीय परीक्षाओं के आयोजन के लिए सुधारों की सिफ़ारिश करना होगा।

अन्य मांगों में पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की गई सिफ़ारिशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश शामिल था। इसके अलावा, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्न-पत्र ट्रांसमिशन प्रणाली, बायोमेट्रिक सत्यापन, AI-आधारित निगरानी तंत्र और मज़बूत साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को अपनाने की भी मांग की गई।

याचिका में प्रश्न-पत्रों की अनिवार्य "डिजिटल लॉकिंग" और धीरे-धीरे CBT मॉडल की ओर बढ़ने के निर्देश भी मांगे गए। इसका उद्देश्य परीक्षा पत्रों को भौतिक रूप से संभालने और उनके परिवहन से जुड़े जोखिमों को खत्म करना था।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया कि वह उन व्यक्तियों, संस्थानों, कोचिंग सेंटरों, बिचौलियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़े आपराधिक मुक़दमे चलाने का निर्देश दे, जो कथित तौर पर परीक्षा पेपर लीक और संगठित नक़ल रैकेट में शामिल हैं। एक और मांग यह थी कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक की जांच पर एक 'स्टेटस रिपोर्ट' (स्थिति रिपोर्ट) मांगी जाए। इस रिपोर्ट में गिरफ़्तारियों, आरोपों और मुक़दमे की प्रगति का विवरण शामिल होना चाहिए। पारदर्शिता से जुड़े उपायों की भी मांग की गई, जिसमें NTA को यह निर्देश देना भी शामिल था कि वह NEET-UG के नतीजे केंद्र-वार आधार पर प्रकाशित करे ताकि किसी भी विसंगति का पता लगाना आसान हो सके।

Case : SUDHAKAR SINGH Vs UNION OF INDIA | W.P.(C) No. 675/2026 Diary No. 30906 / 2026

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