सुप्रीम कोर्ट ने जामिया हमदर्द डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी द्वारा एफिलिएशन की सहमति जारी न होने के बावजूद, मौजूदा एकेडमिक ईयर (2025-2026) के लिए हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) की 49 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों के लिए काउंसलिंग की अनुमति दी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि NEET-PG में शामिल हुए और रैंक हासिल करने वाले पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स के लिए काउंसलिंग 29 जनवरी, 2026 से शुरू होने वाली थी।

कोर्ट ने कहा,

“NMC/प्रतिवादी नंबर 6 को निर्देश दिया जाता है कि वह इन उनचास सीटों को याचिकाकर्ता नंबर 3-इंस्टीट्यूट की सीट मैट्रिक्स में शामिल करे ताकि योग्य उम्मीदवारों की काउंसलिंग हो सके। हमने यह आदेश योग्य उम्मीदवारों के हित को ध्यान में रखते हुए पारित किया, अन्यथा, अगर एकेडमिक ईयर 2025-2026 के दौरान ये सीटें खाली रह गईं तो याचिकाकर्ता नंबर 3/इंस्टीट्यूट की उनचास PG सीटें बर्बाद हो जाएंगी।”

कोर्ट असद मुईद और अन्य लोगों द्वारा दायर SLP पर सुनवाई कर रहा था, जो हमदर्द परिवार के एक गुट से संबंधित हैं और HIMSR के मैनेजमेंट से जुड़े हैं। याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसने एग्जीक्यूटिंग कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें यूनिवर्सिटी को HIMSR को एफिलिएशन देने का निर्देश दिया गया था।

इस मामले की जड़ें एक पारिवारिक समझौते में हैं, जिसके तहत हमदर्द परिवार ने हमदर्द के तहत चलाए जा रहे विभिन्न संस्थानों का कंट्रोल आपस में बांट लिया था। इस समझौते के तहत इस बात पर विवाद पैदा हुआ कि क्या HIMSR जामिया हमदर्द के तहत एक घटक संस्थान के रूप में काम करता है या क्या इसका मैनेजमेंट हमदर्द नेशनल फाउंडेशन की एक अलग समिति के तहत अलग कर दिया गया।

इन विवादों के हिस्से के रूप में जामिया हमदर्द ने UGC Act और UGC (इंस्टीट्यूशंस डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटीज) रेगुलेशन, 2023 के तहत रेगुलेटरी आपत्तियों का हवाला देते हुए HIMSR के लिए एफिलिएशन की सहमति वापस ले ली। इसके कारण दिल्ली हाईकोर्ट में कई आर्बिट्रेशन कार्यवाही, एग्जीक्यूशन याचिकाएं और अपीलें हुईं। 17 दिसंबर, 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक एग्जीक्यूटिंग कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसने जामिया हमदर्द को एफिलिएशन की सहमति जारी करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया और वह यूनिवर्सिटी को कानूनी नियमों के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

इसलिए याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और कहा कि NEET-PG उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग 29 जनवरी, 2026 से शुरू होने वाली है, और जब तक तुरंत निर्देश जारी नहीं किए जाते, शैक्षणिक वर्ष के लिए सभी 49 पोस्टग्रेजुएट सीटें खाली रह जाएंगी।

उन्होंने कहा कि जो स्टूडेंट्स संस्थान में पढ़ना चाहते हैं, उन्हें NEET-PG परीक्षा में उनकी मेरिट के अनुसार काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। काउंसलिंग शुरू होने वाली थी, इसलिए याचिकाकर्ताओं ने सीटों को खाली होने से रोकने के लिए तुरंत आदेश देने की मांग की।

नेशनल मेडिकल कमीशन ने कोर्ट को बताया कि अगर काउंसलिंग की अनुमति दी जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगा, जो स्पेशल लीव पिटीशन के नतीजे पर निर्भर करेगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्थान में शैक्षणिक वर्ष 2025-2026 के लिए 49 पोस्टग्रेजुएट सीटों के लिए काउंसलिंग की अनुमति दी। कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन को निर्देश दिया कि इन 49 सीटों को संस्थान की सीट मैट्रिक्स में शामिल किया जाए ताकि योग्य उम्मीदवारों की काउंसलिंग हो सके।

Case Title – Asad Mueed & Ors. v. Jamia Hamdard Deemed To Be University & Ors.

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