NEET PG 2025-26: कट-ऑफ में कमी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट 28 अप्रैल 2026 को NEET-PG 2025-26 के कट-ऑफ पर्सेंटाइल में कमी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
कोर्ट की पिछली टिप्पणी
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ ने पहले कहा था कि वह इस बात की जांच करेगी कि कट-ऑफ में भारी कमी से पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के स्तर पर कोई असर पड़ता है या नहीं।
याचिकाकर्ताओं की दलील
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि:
पर्याप्त संख्या में छात्र पहले से ही क्वालिफाई कर चुके थे
सीटें खाली रहने की वजह कट-ऑफ नहीं, बल्कि ऊंची फीस है
कट-ऑफ के समर्थन में दलील
सीनियर एडवोकेट डी. एस. नायडू ने केंद्र का समर्थन करते हुए कहा:
कट-ऑफ घटाने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ेगा
सभी उम्मीदवार पहले ही MBBS पास कर चुके होते हैं
कट-ऑफ में कितना बदलाव हुआ?
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिस के अनुसार:
जनरल/EWS: 50th percentile (276 अंक) → 7th percentile (103 अंक)
PwBD (जनरल): 45th → 5th percentile
SC/ST/OBC: 40th percentile (235 अंक) → 0 percentile (माइनस 40 अंक)
याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:
0 और नेगेटिव मार्क्स तक कट-ऑफ गिराना मनमाना (arbitrary) है
यह अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है
इससे मेडिकल शिक्षा के स्तर और मरीजों की सुरक्षा पर असर पड़ेगा
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा:
NEET-PG का उद्देश्य न्यूनतम योग्यता तय करना नहीं, बल्कि मेरिट लिस्ट बनाना है
सभी उम्मीदवार पहले से लाइसेंस प्राप्त MBBS डॉक्टर हैं
अंतिम योग्यता MD/MS परीक्षा में 50% अंक लाकर तय होती है
NBEMS ने स्पष्ट किया कि कट-ऑफ घटाने के फैसले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी, वह केवल परीक्षा आयोजित करता है।
अब इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।