संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में 'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' (LAFC) और उसके चार सदस्यों/वकीलों की ओर से एक रिट याचिका दायर की गई। आरोप है कि 10 और 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने इनके साथ बदसलूकी की और उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया।

यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुश्री प्योली के माध्यम से दायर की गई।

याचिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गईं, जिसमें वकीलों, महिलाओं, नाबालिगों, पत्रकारों और राहगीरों के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार और गैर-कानूनी हिरासत शामिल है। इसमें कानूनी मदद और मेडिकल सहायता न मिलने, पुलिसकर्मियों द्वारा पहचान-पत्र न दिखाने और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने को भी चुनौती दी गई।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 और 22 तथा 'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सुरक्षा उपायों का हवाला दिया गया।

याचिकाकर्ता 'लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन' है, जिसका प्रतिनिधित्व इसकी संयोजक सीनियर एडवोकेट अंजना प्रकाश कर रही हैं। साथ ही वकील फिदेल टॉम, सुमिता हजारिका, अन्ना ओमेन और ऐनी मैथ्यू भी इसमें शामिल हैं।

आरोप है कि फिदेल टॉम के साथ संजय कॉलोनी पुलिस स्टेशन में हिरासत के दौरान मारपीट की गई और उन्हें समय पर कानूनी मदद और मेडिकल सहायता नहीं दी गई। बताया गया कि 10 अक्टूबर 2026 को एक शांतिपूर्ण मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों ने सुश्री सुमिता हजारिका, सुश्री अन्ना ओमेन और सुश्री ऐनी मैथ्यू के साथ बदसलूकी की और उन्हें जबरन हिरासत में लिया।

याचिका में पुलिस की कार्रवाई की स्वतंत्र, समय-सीमा के भीतर और कोर्ट की निगरानी में जांच; CCTV फुटेज और अन्य सबूतों को तुरंत सुरक्षित रखने; हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने; हिरासत में लिए गए लोगों, महिलाओं और नाबालिगों के लिए सुरक्षा उपायों को लागू करने; और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों व पर्यवेक्षी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

इसके अलावा, इसमें इंटरनेट बंद करने की कानूनी वैधता, पत्रकारों की सुरक्षा, शांतिपूर्ण सभाओं के लिए पुलिसिंग से जुड़े बाध्यकारी दिशा-निर्देश, मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवज़ा, और शांतिपूर्ण विरोध या कोर्ट जाने पर बदले की कार्रवाई से सुरक्षा के संबंध में उचित निर्देश देने की मांग की गई।

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