देशभर की अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए CJI ने बनाई समिति, 50 हजार करोड़ रुपये तक की जरूरत का खाका तैयार होगा
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने देशभर की अदालतों में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए न्यायिक अवसंरचना सलाहकार समिति का गठन किया।
समिति अदालतों के लिए 40 हजार करोड़ से 50 हजार करोड़ रुपये तक की वित्तीय आवश्यकता का विस्तृत खाका तैयार करेगी।
8 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के महासचिव भारत पराशर द्वारा जारी संचार के अनुसार समिति का उद्देश्य देशभर की अदालतों की आधारभूत जरूरतों का आकलन कर केंद्र सरकार के समक्ष पर्याप्त वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखना है।
यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार को समिति का अध्यक्ष बनाया गया। समिति में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस देबांगसु बसाक, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा, बॉम्बे हाइकोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरासन और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के महानिदेशक सदस्य होंगे। सुप्रीम कोर्ट के महासचिव समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
समिति को देश की न्याय व्यवस्था में मौजूद आधारभूत ढांचे की कमियों की पहचान करने और जजों, अदालत कर्मचारियों, वकीलों, पक्षकारों तथा अदालत आने वाले लोगों के लिए आवश्यक सुविधाओं की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी गई।
इसके अलावा समिति अदालतों में तकनीकी ढांचे को मजबूत करने के उपाय भी सुझाएगी, ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान तेजी से हो सके और मामलों के निपटारे में होने वाली देरी कम की जा सके।
समिति ई-कोर्ट परियोजना के तहत अदालतों के कंप्यूटरीकरण, नागरिक केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देने और डिजिटल असमानता कम करने के उपायों पर भी सुझाव देगी।
इसके साथ ही आधुनिक अदालत परिसरों के निर्माण और न्यायिक अधिकारियों व प्रशासनिक कर्मचारियों के कार्यस्थल की परिस्थितियों में सुधार के उपायों पर भी विचार किया जाएगा, ताकि न्यायिक व्यवस्था की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके।
समिति को अपनी अंतरिम रिपोर्ट 31 अगस्त 2026 तक सौंपने के लिए कहा गया।