जेपी के फंड्स के गलत इस्तेमाल का पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, ED जांच और बैंकों के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश की RBI ऑडिट की मांग

Update: 2026-05-28 14:24 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका जेपी के घर खरीदार ने दायर की, जिसमें नोएडा के जेपी विशटाउन प्रोजेक्ट में घर खरीदारों से जमा किए गए हज़ारों करोड़ रुपये के कथित गलत इस्तेमाल की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने नोटिस जारी किया, जिसका जवाब 15 जुलाई तक देना है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), UP RERA, NOIDA, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड, जयप्रकाश इंफ्राटेक लिमिटेड और संबंधित संस्थाओं को भी नोटिस जारी किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा:

"मुद्दा यह है कि इस मामले की जांच कर रही ED ने JAL और JIL द्वारा 21,000 से ज़्यादा घर मालिकों से जमा किए गए 14,559 करोड़ रुपये के संबंध में संदेह जताया। एक बड़ी रकम निर्माण के अलावा दूसरे कामों में लगा दी गई और दूसरी संस्थाओं वगैरह को भेज दी गई। एक बड़ा मुद्दा यह भी है कि ऐसा कई प्रोजेक्ट्स में हो रहा है, जहां घर मालिकों से फंड्स जमा किए गए और उन्हें दूसरी जगह भेज दिया गया। समस्या यह है कि घर मालिक ऐसी स्थिति में फंस गए, जहां गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए फंड्स की पहचान नहीं हो पा रही है या उन्हें समय पर वापस नहीं लाया जा पा रहा है, क्योंकि उन्हें दूसरी कंपनियों में भेज दिया गया।"

उन्होंने कहा,

"हमें 12 साल पहले जमा किए गए पैसे पर कोई ब्याज नहीं मिल रहा है। हमने जो निवेश किया था, अगर आज हम वही चीज़ खरीदें, तो उसकी कीमत तीन गुना ज़्यादा होगी।"

घर खरीदार वंदना सभरवाल द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में घर खरीदारों के फंड्स के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के पूरा न होने, रेगुलेटरी विफलताओं और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (RERA) और दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत अपर्याप्त प्रवर्तन का आरोप लगाया गया।

याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता ने नोएडा के सेक्टर 128 स्थित जेपी विशटाउन के "कासाब्लांका" प्रोजेक्ट में आवासीय इकाई बुक की थी, लेकिन एक दशक से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी उसे न तो कब्ज़ा मिला और न ही रिफंड। याचिका में कहा गया कि यह शिकायत सिर्फ़ किसी एक व्यक्ति के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ऐसे मुद्दे उठाए गए हैं, जो बड़ी संख्या में घर खरीदने वालों पर असर डालते हैं।

याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की 8 जनवरी, 2026 की अभियोजन शिकायत का ज़िक्र है, जिसमें कथित तौर पर यह पाया गया था कि घर खरीदने वालों से जमा किए गए 14,599 करोड़ रुपये में से 13,833 करोड़ रुपये जयपी एसोसिएट्स लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज गौर ने दूसरी जगह भेज दिए। इसमें कहा गया कि गौर को 13 नवंबर, 2025 को गिरफ़्तार किया गया और वे अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि ED ने अब तक सिर्फ़ लगभग 400 करोड़ रुपये की संपत्ति ही अस्थायी तौर पर ज़ब्त की है।

याचिका में दावा किया गया कि पैसों को कई तरीकों से दूसरी जगह भेजा गया, जिनमें जयपी समूह की कंपनियों को पैसे भेजना, बाहरी डेवलपर्स को ज़मीन और विकास के अधिकार कथित तौर पर कम कीमतों पर बेचना, और एस्क्रो खातों और जानकारी देने से जुड़े RERA के नियमों का पालन न करना शामिल है।

इसमें आगे आरोप लगाया गया कि 23 मई, 2025 को ED द्वारा 15 जगहों पर तलाशी लेने के बावजूद, जिनमें पांच बाहरी डेवलपर समूहों से जुड़ी जगहें भी शामिल थीं, नौ महीने बीत जाने के बाद भी उनके ख़िलाफ़ कोई पूरक अभियोजन शिकायत या संपत्ति ज़ब्ती की कार्रवाई शुरू नहीं की गई।

मांगी गई मुख्य राहतों में याचिकाकर्ता ने अदालत से यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि ED पांच पहचाने गए "बाहरी डेवलपर लेन-देन समूहों" की जांच 90 दिनों के भीतर पूरी करे और अदालत के सामने समय-समय पर जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। जिन कंपनियों के नाम इसमें शामिल हैं, उनमें गॉरसन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गुलशन होम्ज़ प्राइवेट लिमिटेड, CRC समूह, महागुन रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और हनी कटियाल तथा सन्नी कटियाल से जुड़ी कंपनियाँ शामिल हैं।

याचिका में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भी निर्देश देने की मांग की गई कि वह रियल एस्टेट परियोजनाओं में बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज़ का निगरानी ऑडिट करे और पैसों के अंतिम उपयोग की निगरानी की जांच करे। इसमें परियोजना-वार RERA एस्क्रो ऑडिट कराने, घर खरीदने वालों की सहमति और पहले से नियामक मंज़ूरी लिए बिना परियोजना की ज़मीन को गिरवी रखने पर रोक लगाने और हाईकोर्ट की देखरेख में स्वतंत्र निर्माण निगरानी समितियाँ बनाने की मांग की गई।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने जयपी एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए सफल समाधान आवेदक अडानी समूह, और जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड के लिए सफल समाधान आवेदक सुरक्षा रियल्टी को यह निर्देश देने की मांग की कि वे IBC की धारा 43, 45 और 65 के तहत "परिहार आवेदन" (Avoidance Applications) दायर करें।

ये आवेदन CIRP शुरू होने से पहले कथित तौर पर कम कीमतों पर किए गए संपत्ति हस्तांतरण के संबंध में हैं। याचिका में बरामद संपत्तियों की पारदर्शी नीलामी की मांग की गई, जिससे प्राप्त राशि का उपयोग सर्वप्रथम घर खरीदारों को क्षतिपूर्ति देने के लिए किया जाएगा।

Case Details: VANDANA SABHARWAL Vs UNION OF INDIA|W.P.(C) No. 661/2026 Diary No. 27990 / 2026

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