दिल्ली की मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस हालिया स्पष्टीकरण की ओर दिलाया, जिसमें कहा गया कि मतदाता सूची से हटाए गए लोग खुद को नए मतदाता के रूप में पंजीकृत करने के लिए फॉर्म 6 भर सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के समक्ष मौखिक रूप से यह बात रखी कि 3 नवंबर को ECI द्वारा जारी बयान पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के विपरीत है, जिसमें कहा गया कि जिन मतदाताओं के नाम पहले की मतदाता सूची में थे, उन्हें फॉर्म 6 भरकर खुद को नए मतदाता के रूप में पंजीकृत करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

भूषण की बात का जवाब देते हुए CJI ने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

CJI ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे ECI के इस स्पष्टीकरण का जिक्र करते हुए एक आवेदन दाखिल करें। साथ ही उन्होंने बताया कि इस मामले पर 19 नवंबर को सुनवाई होगी।

चीफ जस्टिस ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर कोर्ट ECI से समय-सीमा (डेडलाइन) और आगे बढ़ाने के लिए कह सकता है।

यह मुद्दा ECI के उस स्पष्टीकरण के बाद उठा, जिसमें कहा गया कि 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट' (ASDD) सूची में शामिल लोग मतदाता सूची में अपना नाम फिर से जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी ने तर्क दिया कि ECI का यह रुख 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उन मौखिक निर्देशों के खिलाफ है, जिनमें कहा गया कि ऐसे लोगों को फॉर्म 8 या 'एन्यूमरेशन फॉर्म' (गणना फॉर्म) का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

28 अक्टूबर को कोर्ट ने ECI के इस जोर पर सवाल उठाया कि जिन मतदाताओं के नाम 'एन्यूमरेशन फॉर्म' जमा न करने के कारण ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिए गए, उन्हें फॉर्म 6 के जरिए आवेदन करना चाहिए। कोर्ट ने बताया कि फॉर्म 6 में आवेदकों को यह घोषणा करनी पड़ती है कि वे पहली बार मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर रहे हैं, जबकि उनके नाम पिछली मतदाता सूची में पहले से मौजूद थे। 3 नवंबर को जारी एक बयान में ECI (भारत निर्वाचन आयोग) ने कहा कि यदि किसी ऐसे मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया तो उसके द्वारा 'फॉर्म 6' भरना 'गलत घोषणा' (False Declaration) नहीं माना जाएगा, भले ही उसने पहले मतदान किया हो।

बयान में कहा गया,

"यह स्पष्ट किया जाता है कि जिस मतदाता का नाम 'ड्राफ्ट मतदाता सूची' (Draft Electoral Roll) में नहीं है, वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 'अंतिम मतदाता सूची' में अपना नाम शामिल कराने के लिए 'फॉर्म 6' जमा कर सकता है। इसलिए, जिस मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उसे 'SIR' (विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया) के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में फिर से अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा—चाहे उसका नाम पहले मतदाता सूची में रहा हो या नहीं। ऐसी स्थिति में 'फॉर्म 6' जमा करने का उद्देश्य केवल मतदाता सूची में नाम शामिल कराना है। इसे केवल इस आधार पर 'गलत घोषणा' नहीं माना जा सकता कि मतदाता का नाम पहले भी सूची में था।"

ECI ने 'निलोतपल दत्ता बनाम ECI' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' का उपयोग करने वाले लोगों को 'गलत घोषणा' के लिए कानूनी कार्रवाई (Prosecution) का डर नहीं होना चाहिए। ECI ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल इस आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी कि उसने पहले मतदान किया।

ECI ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (Chief Electoral Officers) को भेजे गए अपने संदेश में कहा,

"इसके अनुसार, 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत कोई भी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) किसी मतदाता के खिलाफ केवल इस आधार पर कार्रवाई नहीं करेगा कि उसका नाम पहले की मतदाता सूची में था और उसने 'SIR' प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद 'फॉर्म 6' जमा किया। बशर्ते कि उस मतदाता का नाम पहले से किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में न हो और उसके द्वारा दी गई घोषणा कानून के अनुसार सही हो।"

Case Title : M/s Parag Construction (now Dube Constructions) v. Sandhya Nandedkar

अंग्रेज़ी में पढ़़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: