CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च लिया वापस, केंद्र के कदम के बाद SC में बताया
Cockroach Janata Party (CJP) ने मंगलवार को 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा की। CJP के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की दिशा में उठाए गए कदमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष दास ने CJP का बयान पढ़कर सुनाया।
केंद्र ने FIRs वापस लेने का दिया आश्वासन
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र यानी दिल्ली पुलिस के साथ-साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIRs को रद्द करने के लिए आवेदन दाखिल किए हैं।
केंद्र ने यह भी आश्वासन दिया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
SG ने कहा कि ये कदम 25 जुलाई को CJP नेताओं को दिए गए केंद्र के आश्वासन को पूरा करने के लिए उठाए गए हैं।
CJP ने क्या कहा?
कोर्ट में मौजूद सौरव दास ने कहा कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए CJP ने 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लेने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि संगठन अब केंद्र द्वारा किए गए आश्वासनों के अनुपालन की उम्मीद करता है और इस प्रक्रिया में कोर्ट तथा दोनों पक्षों के वकीलों के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष सद्भावना (good faith) से आगे बढ़ें तो सभी मुद्दों को एक-एक करके हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खुले मन से बातचीत करने पर दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे हल न किया जा सके।
5 सितंबर को क्यों होना था प्रदर्शन?
CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर के मार्च का ऐलान किया था। संगठन का आरोप था कि केंद्र ने 25 जुलाई को हुए समझौते में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIRs वापस लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार ने उसे पूरा नहीं किया।
प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाना था। CJP ने कहा था कि NEET अभ्यर्थियों की मौत के मामलों में प्रभावित परिवार और जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोग मार्च का नेतृत्व करेंगे।
CJP ने सरकार पर FIRs वापस लेने में देरी करने और 25 जुलाई की बातचीत में दिए गए आश्वासनों को लिखित रूप में नहीं देने का भी आरोप लगाया था।
अब केंद्र द्वारा FIRs वापस लेने की प्रक्रिया शुरू किए जाने और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन वापस ले लिया गया है।