वकील पर हमले में हत्या के प्रयास की धारा क्यों नहीं लगाई? सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकारा, जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी
सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील पर कथित हमले के मामले में हत्या के प्रयास का आरोप न जोड़ने पर दिल्ली पुलिस की कड़ी आलोचना की। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि पीड़ित के सिर जैसे शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से पर गंभीर चोट पहुंचाई गई, इसलिए हत्या के प्रयास का अपराध दर्ज किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने मामले की जांच स्थानीय पुलिस से लेकर अपराध शाखा को सौंपने का भी निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ ने कहा,
"शरीर के महत्वपूर्ण हिस्से पर लगी चोट की प्रकृति को देखते हुए प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि FIR में हत्या के प्रयास का अपराध शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।"
अदालत ने इसके बाद FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और धारा 118 (गंभीर चोट) जोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य अपराध का भी खुलासा होता है तो संबंधित धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपी जाए। अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता के उस आरोप को देखते हुए दिया कि स्थानीय पुलिस उस पर आरोपियों से समझौता करने का दबाव बना रही है।
कोर्ट ने कहा,
"जब पुलिस पर ही याचिकाकर्ता को समझौते के लिए मजबूर करने के आरोप लगे हैं तो जांच अपराध शाखा को स्थानांतरित की जाती है।"
अदालत ने जांच पूरी होने तक याचिकाकर्ता को दी गई सुरक्षा भी जारी रखने का आदेश दिया।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में 20 वर्षों से अधिक समय से वकालत कर रहे वकील पंकज शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। उन्होंने पुलिस सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और FIR में गंभीर धाराएं जोड़ने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि पंकज शर्मा पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन पुलिस ने इसे सामान्य चोट का मामला मान लिया। उन्होंने अदालत को बताया कि पीड़ित के सिर पर आठ टांके लगे हैं, फिर भी हत्या के प्रयास की धारा नहीं लगाई गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी उसी कॉलोनी के निवासी कल्याण संघ का अध्यक्ष है और स्थानीय पुलिस समझौते का दबाव बना रही है। इसलिए मामले की जांच स्थानीय पुलिस के बजाय क्राइम ब्रांच से कराई जानी चाहिए।
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि उन्होंने इस मामले में दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त से बात की और पीड़ित का सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच कराने को कहा है, ताकि जांच निष्पक्ष बनी रहे।
याचिका के अनुसार 11 जुलाई को पंकज शर्मा पर उनके दिल्ली स्थित घर के भीतर कई लोगों ने हमला किया। आरोप है कि हमलावरों ने उनका सिर लोहे के गेट से कई बार टकराया, जिससे उनके सिर पर गहरी चोटें आईं, अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और आठ टांके लगाने पड़े। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि शुरुआत में पुलिस ने FIR दर्ज करने से इनकार किया और बाद में भी गंभीर धाराएं नहीं लगाईं। साथ ही समझौते के लिए दबाव बनाने और परिवार को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने का भी आरोप लगाया गया।
इन निर्देशों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने वकील पंकज शर्मा की याचिका का निस्तारण किया।