'किसी की गिरफ्तारी का आदेश नहीं दे सकते': ADAG लोन फ्रॉड केस में अनिल अंबानी के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-07-13 11:34 GMT

अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) लोन फ्रॉड केस में जांच एजेंसियों द्वारा सिर्फ़ 'निचले स्तर के अधिकारियों' को गिरफ्तार किए जाने की बात पर सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि कोर्ट के लिए किसी की गिरफ्तारी का आदेश देना सही नहीं होगा।

कोर्ट की यह टिप्पणी याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण की उस दलील के जवाब में थी, जिसमें कहा गया था कि CBI और ED ने केवल छोटे स्तर के अधिकारियों को गिरफ्तार किया, न कि अनिल अंबानी को, जिन्हें SEBI ने अपनी एक रिपोर्ट में 'मुख्य साजिशकर्ता' (kingpin) बताया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच EAS शर्मा द्वारा दायर PIL पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ADAG की कंपनियों द्वारा 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित लोन फ्रॉड की जांच की मांग की गई।

पिछली सुनवाई में, जहां भूषण ने जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में गंभीर आरोप होने के बावजूद अंबानी की गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाया, वहीं अंबानी के वकील सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने टिप्पणी की कि हो सकता है कि उनके (अंबानी) साथ धोखाधड़ी हुई हो। दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी कि ED और CBI द्वारा कई जांच चल रही हैं। CJI ने कहा कि फिलहाल कोर्ट केवल जांच की निगरानी करने की योजना बना रहा है।

सुनवाई के दौरान, भूषण ने कहा कि हालांकि एजेंसियों ने दावा किया कि जून तक 3 चार्जशीट दाखिल की जाएंगी, लेकिन कोई स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई है। इसके जवाब में SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि स्टेटस रिपोर्ट तैयार है, जिसके अनुसार 3 चार्जशीट (CBI द्वारा) और 4 प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (ED द्वारा) दाखिल की जा चुकी हैं, जबकि बाकी मामलों में जांच लंबित है।

याचिकाकर्ता के इस दावे का खंडन करते हुए कि केवल 'निचले स्तर के अधिकारियों' को गिरफ्तार किया गया, SG ने आगे बताया कि ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी गिरफ्तार किया गया।

उनकी बात सुनकर भूषण ने प्रस्ताव दिया कि चार्जशीट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल की जाएं ताकि याचिकाकर्ता यह पता लगा सके कि अनिल अंबानी की क्या भूमिका बताई गई, यदि कोई है तो।

वकील ने पूछा,

"अगर तथ्य ये हैं कि SEBI का कहना है कि वह मुख्य आरोपी (kingpin) थे, वह कंपनी के चेयरमैन थे और सब कुछ उनके निर्देशों पर हो रहा था... तो मुझे कैसे पता चलेगा कि उन्होंने सही तरीके से जांच की है या नहीं?"

इस पर CJI ने कहा कि कोर्ट अपने आदेश में इस बारे में कुछ भी दर्ज नहीं कर रहा है, लेकिन याचिकाकर्ता अंबानी की भूमिका का पता लगाने के लिए CBI द्वारा दायर चार्जशीट देख सकते हैं।

हालांकि, इस पर आपत्ति जताते हुए सिब्बल ने तर्क दिया कि कोर्ट में ऐसी प्रक्रिया पहले कभी नहीं अपनाई गई।

सिब्बल ने कहा,

"इस टिप्पणी से ही हमें नुकसान हो सकता है। चार्जशीट दायर होने के बाद अभी मामले का संज्ञान लिया जाना बाकी है। यह वह प्रक्रिया नहीं है जिसका पालन इस कोर्ट ने कभी किया।"

CJI ने जवाब दिया,

"हम भी इस बात को लेकर बहुत सतर्क हैं कि हमारी तरफ से ऐसा कुछ न हो जिससे किसी पक्ष को नुकसान पहुंचे।"

आखिरकार, कोर्ट ने अपने आदेश में इस बारे में कुछ भी दर्ज नहीं किया। नवीनतम स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने मामले को दोबारा लिस्ट किया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका में अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों द्वारा 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित लोन फ्रॉड की जांच की मांग की गई। इससे पहले, मामले की जांच में एजेंसियों की ओर से हुई "बिना वजह देरी" पर नाराजगी जताते हुए, कोर्ट ने ED और CBI से मामले की जल्द जांच करने को कहा था।

मार्च में एजेंसियों ने जांच पूरी करने के लिए 4 हफ़्ते का समय मांगा। कोर्ट ने ED की एक रिपोर्ट से गौर किया कि अनिल अंबानी ग्रुप की कुछ कंपनियों का 2983 करोड़ रुपये का कर्ज दिवालियापन की कार्यवाही में सिर्फ़ 26 करोड़ रुपये में सेटल कर दिया गया। कोर्ट ने पाया कि ये सभी अधिग्रहण 8 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों द्वारा "प्रोजेक्ट हेल्प" के ज़रिए किए गए।

इससे पहले, CJI कांत ने दिवालिया कंपनियों द्वारा IBC प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। CJI ने कंपनियों द्वारा अपनी संपत्ति परिवार के सदस्यों/दोस्तों को कम कीमत पर नीलाम करने के मुद्दे को उठाया।

अप्रैल में, जब याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि "मुख्य आरोपी" अंबानी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो SG मेहता ने जवाब दिया कि वह यह नहीं बता सकते कि किसी 'X' या 'Y' व्यक्ति को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

Case Title: EAS Sarma v. Union of India and Others, W.P.(C) No. 1217/2025

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