CAPF में IPS प्रतिनियुक्ति संबंधी कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
याचिका में दावा किया गया कि यह कानून CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को निष्प्रभावी करने का असंवैधानिक प्रयास है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ 34 अधिकारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के साथ-साथ शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन बताते हुए इसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की।
याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 मई 2025 को संजय प्रकाश बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट निर्देश दिया कि CAPF में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड तक IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति वाले पदों को निर्धारित अवधि, जैसे दो वर्ष, में चरणबद्ध तरीके से कम किया जाए।
उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को केवल गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (NFFU) के लिए ही नहीं बल्कि कैडर समीक्षा सहित सभी कैडर संबंधी मामलों में भी संगठित ग्रुप-ए सेवाओं का हिस्सा माना जाएगा।
याचिका के अनुसार संसद द्वारा बाद में पारित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 इस न्यायिक निर्णय के प्रभाव को समाप्त करने का प्रयास करता है।
अधिनियम की धारा 3 में प्रावधान है कि "किसी भी न्यायालय के किसी भी निर्णय, डिक्री या आदेश के बावजूद" केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर सीएपीएफ अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित नियम बना सकेगी।
कानून में यह भी निर्धारित किया गया है कि सभी CAPF में महानिरीक्षक के कुल पदों में 50 प्रतिशत, अतिरिक्त महानिदेशक के कम से कम 67 प्रतिशत पद तथा विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के सभी पद IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के संजय प्रकाश तथा हरानंद बनाम भारत संघ के फैसलों को उनकी कानूनी आधारशिला बदले बिना ही निष्प्रभावी कर देता है।
याचिका में कहा गया कि यद्यपि संसद को पूर्व प्रभाव से कानून में संशोधन करने का अधिकार है, लेकिन वह केवल कानून बनाकर किसी न्यायिक निर्णय को निरस्त नहीं कर सकती, जब तक कि उस निर्णय का आधार बनने वाली कानूनी कमियों को दूर न किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 वास्तव में विधायी शक्ति के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को निष्प्रभावी करने का प्रयास है, जो संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया। फिलहाल अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।