IB का कहना है कि जगतार सिंह हवारा को पंजाब की जेल में भेजने से चुनाव पर असर पड़ सकता है: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई टाली
सुप्रीम कोर्ट ने जगतार सिंह हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में भेजने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टाल दी। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि उसे पंजाब भेजने से वहां होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर असर पड़ सकता है। अब इस मामले की सुनवाई तीन महीने बाद, चुनाव खत्म होने के बाद होगी।
हवारा को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट के पिछले आदेश के बाद, जिसमें IB से यह राय मांगी गई कि क्या उसे दूसरी जेल में भेजा जा सकता है, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच के सामने रिपोर्ट पेश की गई। पंजाब सरकार ने कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद बेंच ने IB से इनपुट मांगा था।
हवारा ने पंजाब की जेल में ट्रांसफर की मांग की ताकि वह अपनी बुजुर्ग मां से मिल सके, जिनकी हालत काफी गंभीर बताई जा रही है।
मंगलवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने IB की रिपोर्ट का हवाला दिया। इसमें कानून-व्यवस्था और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई।
हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर ने गृह मंत्रालय के इस रुख पर आपत्ति जताई कि हाई-सिक्योरिटी वाले कैदियों को रखने के लिए तिहाड़ जेल ज्यादा सुरक्षित है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि कम से कम उसे अपनी मां से मिलने की इजाजत तो दी जाए।
मुरलीधर ने कहा:
"उनकी मां 90 साल से ऊपर की हैं। अगर जेल में मुलाकात की बात है तो मैंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पैरोल के लिए अर्जी दी, जो अभी लंबित है। मेरा कहना यह है कि यह नहीं कहा जा सकता कि तिहाड़ जेल, पंजाब की किसी भी अन्य जेल से ज्यादा सुरक्षित है; गृह मंत्रालय ऐसा नहीं कह सकता।"
इस पर जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि आमतौर पर, जेल में मुलाकात की अनुमति देने को लेकर कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं होती है। हालांकि, IB की रिपोर्ट बहुत "गंभीर" है, खासकर इसलिए, क्योंकि कोर्ट का ऐसा कोई भी आदेश आने वाले चुनावों में उथल-पुथल पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा:
"आमतौर पर हमें कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर जांच एजेंसी का कहना है कि मामला बहुत गंभीर है - खासकर मौजूदा हालात में, जब ये मुद्दे देश और विदेश दोनों जगह चर्चा में हैं - तो यह एक बड़ी बात है। दूसरी बात, इसका चल रहे चुनावों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। हम नहीं चाहते कि हमारे आदेशों की वजह से..."
इसके बाद मुरलीधर ने कहा कि अगर चुनाव को लेकर चिंता है तो इस मामले को 3 महीने बाद, यानी चुनाव खत्म होने के बाद लिया जा सकता है। कोर्ट ने इस बात की अनुमति दी।