आर्टिकल 224ए : सुप्रीम कोर्ट एड हॉक एचसी न्यायाधीशों की नियुक्ति पर केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट पर कल विचार करेगा

Update: 2022-12-07 16:05 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अनुरोध पर बढ़ते मामलों की समस्या से निपटने के लिए न्यायाधीशों की एड हॉक नियुक्तियां करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 224ए को लागू करने की मांग करने वाली एनजीओ, लोक प्रहरी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई गुरुवार तक टाल दी है।

अनुच्छेद 224ए एक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश से मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के "न्यायाधीश के रूप में बैठने और कार्य करने" का अनुरोध करने में सक्षम बनाता है। भारत के न्यायिक इतिहास में इस प्रावधान का बहुत कम ही प्रयोग किया गया है।

न्यायालय ने पहले हाईकोर्ट में एड हॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कई दिशा -निर्देश पारित किए थे। सुप्रीम कोर्ट की राय थी कि कुछ सामान्य दिशानिर्देशों की आवश्यकता है ताकि अनुच्छेद 224ए के तहत शक्ति का पारदर्शी तरीके से प्रयोग किया जा सके।

जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एएस ओक और जस्टिस विक्रम नाथ की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार को अभी अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है।

जस्टिस कौल ने माना,

"...क्या हमें अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हर बार जुर्माना लगाना होगा?"

केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने खंडपीठ को अवगत कराया कि स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने रिपोर्ट की कॉपी बेंच को सौंपी। उसी के अवलोकन पर जस्टिस ओक ने कहा -

"अक्टूबर, 20 में दो सिफारिशें की गईं।"

वकील ने खंडपीठ को सूचित किया कि भारत के अटॉर्नी जनरल को वर्तमान मामले में न्यायालय की सहायता करनी है। लेकिन, चूंकि वह संविधान पीठ के समक्ष हैं, इसलिए मामले को स्थगित करने की मांग की गई।

बेंच ने वकील से कहा कि वह अटॉर्नी जनरल को दोपहर 2 बजे पेश होने के लिए सूचित करें। हालांकि, वकील के अनुरोध पर मामले को एक दिन के लिए टाल दिया गया।

[केस टाइतल : लोक प्रहरी बनाम भारत संघ और अन्य। डब्ल्यूपी(सी) नंबर 1236/2019]

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