सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद राष्ट्रपति ने 2003 में दो डकैतों को मारने वाले पूर्व पुलिसकर्मी के लिए वीरता पदक को मंज़ूरी दी
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक कुमार चौहान को 'राष्ट्रपति वीरता पदक' (President's Medal for Gallantry) देने की मंज़ूरी दी। चौहान ने 2003 में मध्य प्रदेश में डकैती-रोधी अभियान के दौरान दो डकैतों को गोली मारकर मार गिराया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच उस मामले की सुनवाई कर रही थी, जो चौहान ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही के तहत शुरू किया। हाईकोर्ट ने उन्हें वीरता पुरस्कार देने का निर्देश दिया।
इससे पहले कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में हुई देरी पर नाराज़गी जताई, जिसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आज कोर्ट को बताया कि राष्ट्रपति ने इस मामले पर फ़ैसला ले लिया।
मेहता ने कहा,
"हम आपके सम्मान का आदर करते हैं और अब फ़ैसला ले लिया गया। राष्ट्रपति ने आदेश जारी कर दिया।"
उन्होंने उस सूचना का संबंधित हिस्सा पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया था कि हाई कोर्ट के आदेश और लागू दिशानिर्देशों के अनुसार प्रस्ताव की समीक्षा की गई।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने 24 जून 2003 की कार्रवाई के लिए एसआई (SI) श्री विवेक कुमार चौहान को वीरता पदक देने की मंज़ूरी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के सचिव जल्द ही भारत के राजपत्र (Gazette of India) में इस पुरस्कार की अधिसूचना जारी करेंगे।
मेहता ने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट के आदेश को मिसाल (precedent) नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे पुरस्कारों का फ़ैसला आख़िरकार राष्ट्रपति ही करते हैं।
कोर्ट ने कहा कि वह केवल अवमानना की कार्यवाही पर विचार कर रहा था और आदेश में इस टिप्पणी की ज़रूरत नहीं थी।
चौहान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मृगेंद्र सिंह ने कहा कि इस घटनाक्रम को देखते हुए चौहान हाईकोर्ट में अवमानना याचिका वापस ले लेंगे।
आदेश में कोर्ट ने दर्ज किया कि मेहता ने गृह मंत्रालय द्वारा जारी 20 अगस्त 2026 की सूचना उसके सामने रखी, जिसके तहत चौहान को वीरता पदक देने की मंज़ूरी दी गई। पुरस्कार की अधिसूचना उचित समय पर भारत के राजपत्र में जारी की जाएगी।
कोर्ट ने कहा,
"इस नज़रिए से देखें तो इस याचिका पर और विचार करने की ज़रूरत नहीं है।"
कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि सिंह का बयान था कि चौहान हाई कोर्ट में चल रही अवमानना की कार्यवाही वापस ले लेंगे।
Case Title – Govind Mohan v. Vivek Singh Chouhan