बच्चों से रेप का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा कानूनी प्रावधान और SC के आदेश के बावजूद नहीं हुए इंतजाम

Update: 2019-07-16 06:13 GMT

देशभर में बच्चों से रेप के मामलों में हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि ये चिंता की बात है कि कानून के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद ऐसे मामलों से निपटने के लिए इंतजाम नहीं किए गए हैं। सोमवार को CJI गोगोई ने कहा, "यह परेशान करने वाला है कि कानूनी प्रावधानों और SC के आदेशों के बावजूद सुविधाएं नहीं दी गईं।"

एमिकस क्यूरी ने बताई मौजूदा स्थिति
पीठ ने एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील वी. गिरी से पूछा कि बाल यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए क्या किया जाए। गिरी ने पीठ को बताया कि कुछ राज्यों में 6 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने के प्रावधान का शून्य कार्यान्वयन है। एक या दो असाधारण मामलों के अलावा, जो कुछ हफ्तों के भीतर पूरे हुए थे, बच्चों से बलात्कार का कोई भी मामला 1 साल की सुनवाई अवधि के भीतर पूरा नहीं हुआ।

इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या 
उन्होंने कहा कि दिल्ली को छोड़कर किसी भी अन्य राज्यों में बच्चों के लिए अलग प्रतीक्षा कक्ष, गवाह परीक्षा कक्ष के प्रावधान नहीं बनाए गए हैं। बाल पीड़ितों और माता-पिता को भीड़ भरी अदालत में लंबे समय तक इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके लिए संसाधन जुटाने होंगे और इसमें सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप जरूरी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 6 महीने में 170 मामले ट्रायल के लिए भेजे गए लेकिन 2 मामलों में ही ट्रायल पूरा हुआ है।

अदालत ने मांगा लंबित मामलों का जिलावार ब्रेकअप
गिरी ने कहा कि इसके लिए बुनियादी ढांचे में बदलाव एक जरूरत है। POCSO अदालतों के गठन और विशेष प्रशिक्षित अभियोजकों की आवश्यकता है। पीठ ने कहा, "हमारे पास उपलब्ध आंकड़े केवल जनवरी से जून तक के हैं और पुराने मामलों की लंबितता बहुत अधिक होनी चाहिए। हमें लंबित मामलों का एक जिलावार ब्रेकअप चाहिए। फोरेंसिक की सुविधा, जांच प्रक्रिया, एक बच्चे की गवाही दर्ज करना - पूरी बात पर विचार करना होगा।"

कोर्ट ने 10 दिन के भीतर मांगे हैं संबंधित आंकड़े
पीठ ने गिरी को इसे सुव्यवस्थित करने के लिए सुझाव देने के लिए कहा। पीठ ने रजिस्ट्री को यह कहा है कि वो जनवरी से पहले बच्चों से बलात्कार के मामलों की कुल संख्या, मामले कितने समय से लंबित हैं, कितने ट्रायल पूरे हुए ये सब डेटा 10 दिनों में दाखिल करे। पीठ अब इस मामले की सुनवाई 25 जुलाई को करेगा। इससे पहले पीठ ने इस मामले में वरिष्ठ वकील वी. गिरी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।

CJI रंजन गोगोई की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा था कि गिरि इस मामले में मैनपावर, बुनियादी ढांचा, साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के लिए कमरे आदि प्रदान करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने में मदद करेंगे।

अदालत ने कहा कि केंद्र को उठाने होंगे कदम
इस दौरान पीठ ने बच्चों के साथ बलात्कार के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा था कि ये एक गंभीर मामला है और केंद्र सरकार को इस पर कदम उठाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है। केंद्र ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की बच्चों से रेप मामलों में जीरो टालरेंस पॉलिसी के साथ है।

CJI ने लिया है बच्चों के साथ रेप की बढ़ती घटनाओं पर स्वत: संज्ञान
दरअसल CJI रंजन गोगोई ने मीडिया में देश भर में बच्चों के साथ रेप की लगातार बढ़ रही घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरु की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से पूरे देश में 1 जनवरी से 30 जून तक ऐसे मामलों में दर्ज FIR और कानूनी कार्रवाई का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए थे और रजिस्ट्री ने देश के सभी उच्च न्यायालयों से आंकड़े एकत्रित किए।

कुल दर्ज मामलों में से केवल 4 फीसदी में आया है फैसला
इनके अनुसार 1 जनवरी से 30 जून तक देश भर में बच्चों से रेप के 24 हज़ार से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें से 11981 मामलों में जांच चल रही है जबकि 12231 केस में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है लेकिन 6649 मामलों में ही ट्रायल शुरू हो पाया है। अभी ट्रायल कोर्ट 911 मामलों में ही फैसला दे पाया है यानी कुल मामलों का 4 फीसदी।

उत्तरप्रदेश में स्थितियां हैं गंभीर
इस सूची में उत्तरप्रदेश 3457 मुकदमों के साथ पहले स्थान पर है जबकि 9 मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे निचले पायदान पर है। उत्तरप्रदेश में 50 प्रतिशत से ज्यादा 1779 मामलों की जांच ही पूरी नहीं हो पाई है। इन मामलों में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल नहीं हो पाई है। सूची में मध्यप्रदेश दूसरे नम्बर पर है। 2389 मामले तो हुए लेकिन पुलिस ने 1841 मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल की। राज्य की निचली अदालतों ने 247 मामलों में तो ट्रायल भी पूरा कर लिया है।

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