कलकत्ता हाईकोर्ट का निर्देश: अग्निवीर अभ्यर्थी के मतदाता सूची विवाद पर जल्द फैसला करे अधिकरण
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अपीलीय अधिकरण, कूचबिहार को निर्देश दिया कि अग्निवीर भर्ती के एक अभ्यर्थी की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ लंबित अपील का जल्द निस्तारण किया जाए। अदालत ने यह आदेश तब दिया, जब राज्य सरकार ने कहा कि अपील का फैसला होने के बाद ही पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
जस्टिस बिवास पटनायक की पीठ जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में आकाश सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने अपनी लंबित अपील का शीघ्र निस्तारण कराने और भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में नियुक्ति के लिए आवश्यक पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र जारी कराने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर चुका है और नियुक्ति से पहले छह माह की वैधता वाला पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य है। हालांकि पहले उसे 15 नवंबर 2025 को प्रमाणपत्र मिल चुका था, लेकिन मतदाता सूची से नाम हटने के बाद पुलिस ने नया प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का किसी व्यक्ति की नागरिकता से कोई संबंध नहीं है। इसलिए केवल इसी आधार पर पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र रोका नहीं जा सकता।
यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता और उसके पिता फारूक सरकार ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अलग-अलग अपीलें दायर की हैं, जो अभी भी SIR अपीलीय अधिकरण में लंबित हैं।
वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जब तक SIR अपील का फैसला नहीं हो जाता, तब तक पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह भी कहा गया कि अधिकरण ऐसे मामलों का नियमित रूप से निस्तारण कर रहा है।
निर्वाचन आयोग की ओर से भी लंबित अपीलों के शीघ्र निस्तारण का समर्थन किया गया।
अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि याचिकाकर्ता ने 3 जून 2026 को पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ उसकी तथा उसके पिता की अपीलें अब भी लंबित हैं।
राज्य सरकार के इस आश्वासन को दर्ज करते हुए कि अपील का निस्तारण और आवश्यक सत्यापन पूरा होने के बाद कानून के अनुसार शीघ्र प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा, हाईकोर्ट ने SIR अपीलीय अधिकरण से अनुरोध किया कि याचिकाकर्ता की 1 अप्रैल 2026 तथा उसके पिता की 2 अप्रैल 2026 की अपील का यथाशीघ्र निस्तारण किया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी पक्ष से शपथपत्र नहीं मांगा गया, इसलिए याचिका में लगाए गए आरोपों को स्वीकार किया हुआ नहीं माना जाएगा।