बैंक अकाउंट खोलने पर अंतरिम राहत: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को रोजमर्रा के खर्च की दी अनुमति
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उसके तीन सील किए गए बैंक खातों से रोजमर्रा के खर्च करने की अनुमति दी।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था विशेष अधिकारी की निगरानी में लागू रहेगी और इससे किसी भी गुट को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि मानने का कोई संकेत नहीं माना जाएगा।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने पूर्व जज जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया। यह अंतरिम व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
कोर्ट ने कहा कि पार्टी के असली गुट का विवाद अभी भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित है और इस आदेश का उस विवाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान TMC की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि बैंक अकाउंट पर डेबिट रोक लगाए जाने से एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का सामान्य कामकाज लगभग ठप हो गया।
उन्होंने कहा कि यह संविधान के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है और लोकतंत्र में सभी दलों के लिए समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करता है।
कोर्ट ने भी राज्य सरकार से सवाल किया कि शिकायत दर्ज होने के महज एक दिन बाद बैंक अकाउंट फ्रीज करने का आधार क्या था।
पीठ ने टिप्पणी की,
"18 जून को FIR दर्ज हुई और 19 जून को जल्दबाजी में खाते फ्रीज कर दिए गए। इस स्तर पर अदालत को ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे इतने अचानक उठाए गए कदम को उचित ठहराया जा सके।"
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा,
"जब कोई गरीब नागरिक थाने जाता है तो पुलिस इतनी सक्रिय नहीं दिखती लेकिन यहां शिकायत के तुरंत बाद अकाउंट फ्रीज कर दिए गए। आखिर इतनी तेजी क्यों दिखाई गई?"
राज्य पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106 पुलिस को जांच के दौरान संपत्ति जब्त करने का अधिकार देती है।
उनका कहना था कि कथित अपराध से जुड़ी राशि के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम आवश्यक था। उन्होंने यह भी दलील दी कि किसी एक गुट को खाते संचालित करने की अनुमति देना उसे वास्तविक TMC के रूप में मान्यता देने जैसा होगा।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम व्यवस्था का किसी भी गुट को वैध TMC घोषित करने से कोई संबंध नहीं है।
वास्तविक शिकायतकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल और एडवोकेट के. परमेश्वर ने दावा किया कि उनके मुवक्किल ही वास्तविक TMC का प्रतिनिधित्व करते हैं और अकाउंट की सुरक्षा की मांग की।
इस पर कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर कार्यवाही के दायरे का विस्तार नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता पहले इन्हीं बैंक अकाउंट से चुनाव लड़ने के लिए धन का उपयोग कर चुके थे और बाद में दूसरे गुट में शामिल होने के बाद शिकायत दर्ज कराई। ऐसे में इस चरण पर उनका आचरण भरोसा पैदा नहीं करता।
अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायत सामान्य प्रकृति की प्रतीत होती है और उसमें ऐसा कोई विशिष्ट लेनदेन नहीं बताया गया, जिससे यह साबित हो कि इन अकाउंट में अवैध तरीके से धन जमा किया गया।
अंतरिम व्यवस्था के तहत तीनों बैंक अकाउंट के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विशेष अधिकारी के समक्ष चेक प्रस्तुत करेंगे। विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर के बाद ही चेक बैंक में प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निकासी केवल पार्टी के दैनिक संचालन संबंधी खर्चों तक सीमित रहेगी। किसी बड़े खर्च के लिए विशेष अधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी, जबकि कानूनी खर्च की अनुमति रहेगी।
हाईकोर्ट ने पुलिस को जांच जारी रखने की छूट दी है। साथ ही संबंधित बैंकों को सभी अकाउंट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच एजेंसी के मांगने पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस बीच भारत निर्वाचन आयोग किसी गुट को आधिकारिक मान्यता देता है, तो संबंधित पक्ष अंतरिम आदेश में संशोधन की मांग कर सकते हैं।