एक्टर इमरान खान की 'Leave India नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में कल होगी सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट एक्टर इमरान खान की उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) की ओर से जारी 'भारत छोड़ने की नोटिस' को चुनौती दी।
सोमवार 23 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ को बताया गया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मामले में पेश होंगे। इसके बाद सुनवाई दोपहर 3 बजे के लिए रखी गई। हालांकि दोपहर के भोजन के बाद सीनियर एडवोकेट वेंकटेश धोंड ने अभिनेता की ओर से पेश होकर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। अब मामले को मंगलवार दोपहर 3 बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
अमेरिकी नागरिक और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक इमरान खान को 11 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया था।
उन्हें जारी नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि वह 28 अक्टूबर तक भारत नहीं छोड़ते हैं तो इमिग्रेशन एवं विदेशी अधिनियम 2025 के संबंधित प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है।
एडवोकेट जुल्फिकार मेमन, परवेज मेमन और चिराग नाइक के माध्यम से दायर याचिका में इमरान ने कहा कि कुछ राजनीतिक व्यक्तियों की शिकायतों के आधार पर जल्दबाजी में उन्हें देश छोड़ने का नोटिस जारी कर दिया गया।
शिकायतों में आरोप लगाया गया कि वह प्रदर्शन में शामिल हुए थे लेकिन याचिका के अनुसार ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि उन्होंने प्रदर्शन में भाग लिया या भीड़ जुटाई थी।
याचिका में कहा गया कि नोटिस में इमरान को 28 अक्टूबर, 2026 तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया, लेकिन इसके लिए कोई कारण, सहायक सामग्री या कानून के किसी विशिष्ट प्रावधान के उल्लंघन का उल्लेख नहीं किया गया। नोटिस जारी करने से पहले कोई जांच नहीं की गई न ही कारण बताओ नोटिस दिया गया या अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि FRRO यदि मामले पर सामान्य रूप से भी विचार करता तो उसे इमरान की वैध ओसीआई स्थिति और घटना से जुड़े तथ्यों का पता चल जाता।
याचिका के अनुसार, 10 अक्टूबर, 2026 को नाना चौक स्थित अगस्त क्रांति मैदान के पास पुलिस ने उन्हें अनुचित तरीके से और थोड़े समय के लिए हिरासत में लिया था।
इमरान का दावा है कि जब वह घटनास्थल पर पहुंचे, तब वहां कोई सभा नहीं हो रही थी। उन्होंने न तो किसी प्रतिबंधित या बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में प्रवेश किया और न ही पुलिस के वहां से जाने के निर्देश की अवहेलना की।
याचिका के मुताबिक जब वह अपनी नजदीकी खड़ी गाड़ी की ओर लौट रहे थे तभी मीडिया के लोग उनके आसपास जमा हो गए और इसी दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम या नागरिकता अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया। OCI कार्डधारक के रूप में उनके अधिकारों और दायित्वों को नियंत्रित करने वाले कानून के किसी विशिष्ट प्रावधान के उल्लंघन का उल्लेख भी नोटिस में नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया कि इमरान दो वर्ष की उम्र से भारत में रह रहे हैं और उनके पारिवारिक, वैवाहिक, शैक्षणिक तथा पेशेवर संबंध भारत से गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी करते हुए नोटिस जारी किया गया, जो अधिकारियों की ओर से उचित विचार न किए जाने और एक सार्वजनिक हस्ती को मनमाने तरीके से निशाना बनाए जाने को दर्शाता है।
याचिका में कहा गया कि नोटिस स्पष्ट रूप से असंगत और अनुचित है। यदि इसे लागू किया गया तो प्राकृतिक न्याय के उन सिद्धांतों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा जिनका पालन करना अधिकारियों का दायित्व है। इसलिए इमरान ने नोटिस के क्रियान्वयन पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने और अंततः उसे रद्द करने की मांग की।
इमरान ने अपनी याचिका में मुंबई पुलिस की कार्रवाई को भी अवैध बताया। उनका कहना है कि वह प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थे और जब वह मौके पर पहुंचे तब प्रदर्शन शुरू भी नहीं हुआ था।
याचिका के अनुसार वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ घटनास्थल के पास खड़े होकर मीडिया से बातचीत कर रहे थे तभी पुलिस उन्हें वहां से ले गई।
याचिकाकर्ता का दावा है कि पुलिसकर्मी पहले उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को अपने वाहनों में बैठाकर करीब एक घंटे तक शहर में घुमाते रहे। इसके बाद उन्हें दक्षिण मुंबई के येलो गेट पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इमरान के मुताबिक पुलिस के पास उन्हें हिरासत में रखने के संबंध में कोई निर्देश नहीं थे इसलिए उन्हें और उनके परिवार को छोड़ दिया गया।
याचिका में कहा गया है कि जब इमरान ने पुलिस अधिकारियों से हिरासत में लिए जाने का कारण पूछा तो वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। बाद में उन्हें और उनके परिवार को पुलिस स्टेशन से जाने की अनुमति दी गई और वह बाहर आ गए।
इसके बाद जब इमरान और उनके परिवार ने टैक्सी लेने की कोशिश की तो कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मियों ने उनका पीछा किया और टैक्सी चालक को डराया-धमकाया। इसके कारण चालक ने उन्हें ले जाने से इनकार किया।
याचिका के अनुसार इसके बाद परिवार को पैदल भिंडी बाजार की ओर जाना पड़ा और रास्ते में फ्लाईओवर पार करना पड़ा। बाद में उन्होंने किसी तरह वाहन की व्यवस्था की और घर लौटे।
याचिका में आगे कहा गया कि इमरान को बाद में पता चला कि कुछ राजनीतिक नेताओं की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। इसके महज पांच दिन के भीतर FRRO ने कथित तौर पर बिना स्वतंत्र और उचित विचार किए भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि शिकायत के कुछ ही दिनों के भीतर नोटिस जारी करने की असाधारण जल्दबाजी से संकेत मिलता है कि यह किसी स्वतंत्र, निष्पक्ष और कानूनी आकलन के आधार पर नहीं बल्कि बाहरी कारणों या प्रतिक्रिया के तौर पर जारी किया गया। इस दौरान उन्हें न तो कोई नोटिस या समन दिया गया न ही आरोपों की जानकारी दी गई और न ही अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर मिला।
इमरान ने यह भी कहा कि नोटिस में उनकी वैध OCI स्थिति का कोई उल्लेख नहीं है। उनके अनुसार इससे नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत उपलब्ध वैधानिक सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई है। उनका आरोप है कि तथ्यों पर समुचित विचार किए बिना उन्हें देश से बाहर करने जैसा गंभीर कदम उठाया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए और उचित विचार के बिना जारी किया गया ऐसा आदेश मनमाना, अवैध, असंवैधानिक और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसलिए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट से नोटिस पर तत्काल रोक लगाने और उसे रद्द करने का अनुरोध किया।