भीमा कोरेगांव मामला: बॉम्बे हाइकोर्ट ने 5 साल की जेल के बाद रमेश गाइचोर और सागर गोरखे को दी जमानत
बॉम्बे हाइकोर्ट ने शुक्रवार को एल्गार परिषद–भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए रमेश गाइचोर और सागर गोरखे को जमानत दी। दोनों आरोपी वर्ष 2020 से जेल में बंद थे। हाइकोर्ट ने लंबी अवधि तक हिरासत में रहने को आधार बनाते हुए यह राहत दी।
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की डिवीजन बेंच ने यह आदेश पारित किया।
गौरतलब है कि रमेश गाइचोर और सागर गोरखे, दोनों कबीर कला मंच के सदस्य हैं। उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 7 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था।
NIA के अनुसार, दोनों ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
NIA का आरोप है कि रमेश गाइचोर ने इस कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिए, जिनका उद्देश्य हिंसा को उकसाना और नक्सली गतिविधियों तथा माओवादी विचारधारा का प्रचार करना था।
वहीं सागर गोरखे पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने सांस्कृतिक गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से माओवादी विचारधारा को बढ़ावा दिया और हिंसा के लिए उकसाया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, शुरुआत में NIA ने दोनों को सरकारी गवाह बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, जब उन्होंने सहयोग करने से इनकार कर दिया तो उन्हें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया। उन पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन का सक्रिय सदस्य होने और सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया।
भीमा कोरेगांव मामले में अब तक कई आरोपियों को राहत मिल चुकी है।
बॉम्बे हाइकोर्ट ने पहले रोना विल्सन, सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धवाले और सुधा भारद्वाज को जमानत दी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पी. वरवर राव को चिकित्सीय आधार पर, जबकि शोमा सेन, वर्नन गोंसाल्विस और अरुण फरेरा को मामले के गुण-दोष के आधार पर जमानत प्रदान की।