बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया चलने के दौरान भी कोई नागरिक अपना पता बदलने के लिए 'फॉर्म 8' जमा कर सकता है। ऐसे में उनका नाम हटाना, उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करने के बराबर होगा।

जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को साल्गांवकर परिवार के छह सदस्यों के नाम वापस जोड़ने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत जब मतदाता सूची (Roll) को नए सिरे से तैयार किया जा रहा हो, तब भी नियम 13 (धारा 22 के साथ) लागू रहता है। इसके तहत नए मतदाता के लिए 'फॉर्म 6' और पता बदलने वाले मतदाता के लिए 'फॉर्म 8' जमा करने की अनिवार्यता खत्म नहीं होती है।

जजों ने कहा,

"हम चुनाव आयोग के इस तर्क को खारिज करते हैं कि SIR प्रक्रिया के दौरान, ERO (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को यह अधिकार है कि वह 'फॉर्म 8' पर कार्रवाई करने से मना कर दे। हमारी स्पष्ट राय है कि मतदाता सूची के रिवीजन (चाहे वह इंटेंसिव हो या समरी) के दौरान भी धारा 22 या नियम 13 के प्रावधान निलंबित नहीं होते, बल्कि वे लागू रहते हैं। इसलिए 'फॉर्म 8' प्राप्त करने वाले ERO को उस आवेदन पर निर्णय लेना ही होगा।"

कोर्ट ने आगे कहा कि यदि कोई मतदाता उसी निर्वाचन क्षेत्र में अपना पता बदलने के लिए 'फॉर्म 8' जमा करता है (जैसा कि याचिकाकर्ताओं ने किया है) तो संशोधित मतदाता सूची से उसका नाम हटा देना—और वह भी बिना उसे अपनी बात रखने का मौका दिए—नागरिक के वोट देने के अधिकार को छीनने जैसा है।

खंडपीठ ने 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के नियम 21A का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई मतदाता किसी निर्वाचन क्षेत्र में नहीं रह रहा है तो ERO को उसे यह बताने का उचित अवसर देना चाहिए कि उसके खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

जजों ने कहा,

"यह नियम RP अधिनियम की धारा 22 के प्रावधान को दर्शाता है, जिसके तहत ERO को उस व्यक्ति को—जिसका नाम मतदाता सूची में तो है, लेकिन ऊपर बताए गए किन्हीं कारणों से उसे हटाया जाना है—नाम हटाने से पहले अपनी बात रखने का मौका (सुनवाई का अवसर) देना आवश्यक है।"

Case Title : Paresh Salgaonkar v.The State of Goa & Others

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