बॉम्बे हाईकोर्ट का केंद्र से सवाल- क्या OCI कार्ड होल्डर BCCI टूर्नामेंट में खेल सकते हैं?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (10 सितंबर) को 12 ऐसे उभरते हुए क्रिकेटरों को, जिनके पास ओवरसीज सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) कार्ड है, निर्देश दिया कि वे अपनी याचिकाओं में केंद्र सरकार को भी पक्षकार (party) बनाएं। इन क्रिकेटरों ने बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फ़ॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) के उस फ़ैसले को चुनौती दी, जिसमें खिलाड़ियों के लिए किसी भी टूर्नामेंट में खेलने के लिए 'भारतीय पासपोर्ट' अनिवार्य कर दिया गया।
चीफ़ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीज़न बेंच ने कहा कि मौजूदा याचिकाओं में केंद्र सरकार को प्रतिवादी (Respondent) बनाना ज़रूरी है ताकि इस मुद्दे पर उसका रुख समझा जा सके, क्योंकि इस मामले में पारित किसी भी आदेश के 'बड़े असर' हो सकते हैं।
चीफ़ जस्टिस त्रिपाठी ने मौखिक रूप से कहा,
"इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने या फ़ैसला लेने के बड़े असर हो सकते हैं, इसलिए केंद्र सरकार का इन याचिकाओं में पक्षकार होना ज़रूरी है... मान लीजिए कि केंद्र सरकार ये सुविधाएँ देने के पक्ष में है, या मान लीजिए कि हम कोई आदेश पारित करते हैं और उसका कोई गंभीर असर होता है। फिर केंद्र सरकार उसे वापस लेने (Recall) की मांग करती है तो क्या होगा? मान लीजिए केंद्र सरकार का रुख यह है कि कोई OCI कार्ड होल्डर हमारे देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। असल में इससे मदद मिलेगी... इसलिए बेहतर होगा कि आप केंद्र सरकार को प्रतिवादी के तौर पर शामिल करें।"
जज कविन कार्तिक और 11 नाबालिगों की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इन नाबालिगों ने जन्म से ही विदेशी नागरिकता हासिल की, लेकिन उनके माता-पिता भारतीय नागरिक बने हुए हैं, इसलिए उनके पास OCI कार्ड हैं और वे भारत में रहकर पढ़ाई और क्रिकेट खेल रहे हैं।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने BCCI के 30 अप्रैल, 2024 के फ़ैसले पर आपत्ति जताई है। इस फ़ैसले में तय किया गया कि केवल भारतीय पासपोर्ट वाले खिलाड़ियों को ही BCCI से जुड़ी किसी भी क्रिकेट संस्था द्वारा आयोजित टूर्नामेंट में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। विदेशी नागरिकता वाले खिलाड़ियों को ऐसे टूर्नामेंट में भाग लेने से रोक दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि देश की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय टीमों में चुने जाने के लिए भारतीय नागरिकों को ज़्यादा मौके मिल सकें।
याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस करते हुए वकीलों कुणाल चीमा और दत्ता माने ने कहा कि BCCI एक निजी संस्था है और उसने यह फ़ैसला खुद लिया है, जिससे जनता के अधिकारों पर असर पड़ता है।
चीमा ने तर्क दिया,
"अगर बचपन में हमें खेलने की इजाज़त नहीं मिलती तो हमारे अधिकारों और विकास का क्या होगा?"
हालांकि, चीफ जस्टिस त्रिपाठी ने कहा,
"मान लीजिए कि भारतीय नागरिक आकर कहें कि यह (OCI कार्ड होल्डर्स को इजाज़त देना) भेदभावपूर्ण है और भारतीय नागरिक होने के नाते OCI होल्डर्स की वजह से हमें हमारे अधिकारों से वंचित किया जा रहा है तो क्या होगा?"
चीफ जस्टिस ने चीमा का ध्यान इस बात की ओर भी दिलाया कि अफ़गानिस्तान के नागरिक BCCI के साथ खेलने के लिए भारत में बस रहे हैं।
CJ ने कहा,
"क्या आपने पढ़ा है कि कुछ अफ़गानी खिलाड़ी भारत में बस गए हैं और भारतीय नागरिकता के लिए लाइन में हैं ताकि वे BCCI के साथ खेल सकें... यहां तक कि उनका वेन्यू भी तय हो गया... अब चीज़ें खुल रही हैं और हम पीछे नहीं हट रहे हैं... हम बस यह जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार क्या कहती है..."
चीमा ने आगे बताया कि BCCI ऐसे OCI कार्ड होल्डर खिलाड़ियों और यहां तक कि विदेशियों को भी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेलने की इजाज़त दे रहा है। हालांकि, बेंच ने उनसे कहा कि वे मुद्दों को न मिलाएं क्योंकि IPL एक अलग संस्था है।
CJ त्रिपाठी ने कहा,
"लेकिन वह बिल्कुल अलग संस्था है... वह एक कमर्शियल वेंचर है, दोनों चीज़ों को न मिलाएं... वे देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं... असल में, हम बच्चे के खेलने और विकास के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं... हमने अभी तक कोई फैसला नहीं किया। इसलिए हम बस केंद्र सरकार का पक्ष जानना चाहते हैं, बस इतना ही।"
इसके साथ ही जजों ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और मौजूदा याचिकाओं पर अपना जवाब (हलफनामा) दाखिल करने का आदेश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
Case Title: Kavin Kartik vs Board of Control for Cricket in India (BCCI) (Writ Petition 2307 of 2026)