बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 21 अक्टूबर को सार्वजनिक सड़कों और अस्पतालों, स्कूलों जैसे आसपास के शांत क्षेत्रों में पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध के आदेशों का पालन नहीं होने पर नगर निकाय और पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, खासकर धार्मिक जुलूसों के दौरान, इन आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने दुर्गा विसर्जन जुलूसों के दौरान अदालत के आदेशों के उल्लंघन पर संज्ञान लेते हुए संबंधित नगर निकाय और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने सभी अधिकारियों को 15 अक्टूबर के आदेश से अवगत कराएं। इस आदेश में पूरे साल पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया।

खंडपीठ ने कहा कि मौजूदा कार्यवाही में आदेश पारित होने के बावजूद सरकारी तंत्र अदालत के निर्देशों का पालन करने में बेहद धीमी गति से काम करता दिखाई दे रहा है। अदालत ने कहा कि अभी तक उन बुनियादी कदमों पर भी अमल नहीं किया गया, जिनके तहत नगर निगम और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयुक्त रूप से समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और प्रचार के अन्य माध्यमों से सार्वजनिक सूचना जारी करनी थी।

अदालत के मुताबिक, इन सूचनाओं के जरिए लोगों को यह बताना था कि सार्वजनिक स्थानों, जिनमें सड़कें, गलियां और फुटपाथ शामिल हैं, वहां पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, लोगों को पटाखों से निकलने वाले जहरीले तत्वों और उनसे होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना था तथा शोर, धुएं और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे न फोड़ने की अपील करनी है।

खंडपीठ ने कहा कि प्रतिबंध के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने की जरूरत को अदालत पहले ही अपने आदेश में स्पष्ट कर चुकी है। संबंधित नोडल अधिकारियों को मिलने वाली शिकायतों का अत्यंत तत्परता से निपटारा किया जाना चाहिए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।

हाईकोर्ट ने पुलिस तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शोर और वायु प्रदूषण से जुड़े उल्लंघनों को रोकने में पुलिस भी नाकाम रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि मुंबई के विभिन्न पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारी 15 अक्टूबर के आदेशों से अनजान दिखाई देते हैं।

खंडपीठ ने कहा कि जुलूसों में म्यूजिक सिस्टम इस्तेमाल करने से पहले आवश्यक अनुमति लेने और ध्वनि की निर्धारित डेसीबल सीमा का पालन करने का लिखित आश्वासन देने जैसे मुद्दों पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। व्यस्त सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने की घटनाओं को भी नियंत्रित नहीं किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि उसके आदेशों का लगातार उल्लंघन हो रहा है, खासकर जुलूसों और सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने के मामलों में।

अदालत ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि पुलिस विभाग के प्रत्येक अधिकारी को हाईकोर्ट के आदेशों की जानकारी हो, ताकि उल्लंघन होने पर उचित कार्रवाई की जा सके।

खंडपीठ ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस तंत्र की लापरवाही से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत नागरिकों को मिले अधिकार प्रभावित होते हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

हाईकोर्ट ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की।

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