बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने सोमवार, 28 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CIC) ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर जारी 14 आदेशों और कार्रवाइयों को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इन फैसलों पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति दर्ज कराई थी।

जस्टिस शर्मिला देशमुख और जस्टिस नीरज धोटे की खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट असीम सरोदे ने याचिका का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, पीठ ने अपने रोस्टर में लंबित मामलों के भार का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई देने से इनकार किया। मामले की सुनवाई 22 अक्टूबर को होने की संभावना है।

याचिका में पिछले करीब दस महीनों के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा की गई 14 प्रशासनिक कार्रवाइयों और आदेशों को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन कार्रवाइयों का संबंध मतदाता सूची तैयार करने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची के आंकड़ों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के कामकाज से है।

याचिका में हाल में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने, विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं की बहाली से जुड़े आदेशों के खिलाफ अपील तथा मतदाता सूची के आंकड़ों के प्रबंधन और उस तक पहुंच जैसे विषय शामिल हैं।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-6 में कथित बदलाव और मतदाता सूची के आंकड़ों तक पहुंच के क्रमिक केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। याचिका के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी सूची से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे में कार्य-विभाजन में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव से भी संपर्क किया था।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि चुनावी सूची तैयार करने, उसके पुनरीक्षण और रखरखाव से जुड़े फैसलों में कथित अनियमितताओं से संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित होती है। याचिका में कहा गया कि इन कार्रवाइयों से संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार और अनुच्छेद 326 के तहत वयस्क मताधिकार से जुड़े संवैधानिक अधिकार पर असर पड़ता है।

याचिका में 14 कथित कार्रवाइयों को रद्द करने के साथ-साथ हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने, कानूनी रूप से वैध मतदाता सूचियां तैयार और स्वीकृत होने तक आगामी विधानसभा चुनाव स्थगित करने तथा कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित करने की मांग भी की गई।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों का निर्वहन करते समय लोकतांत्रिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक और लचीला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया। हालांकि, अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होने की संभावना है।

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