कोर्ट की सहमति डिक्री के रजिस्ट्रेशन के लिए हाउसिंग सोसायटी की NOC जरूरी नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश से हुई सहमति डिक्री के रजिस्ट्रेशन के लिए कलेक्टर सहकारी हाउसिंग सोसायटी से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC लेने की शर्त नहीं लगा सकता जब कानून में ऐसी कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वैधानिक प्रावधान, नियम, विनियम या अधिसूचना के अभाव में सोसायटी की NOC मांगना कानूनी रूप से बाध्यकारी डिक्री के क्रियान्वयन में बाधा डालने वाला रवैया है।
जस्टिस अद्वैत एम. सेठना और जस्टिस सुमन श्याम की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें कलेक्टर को 22 अगस्त 2024 के आवेदन पर फैसला करने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर से सोना महल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की NOC पर जोर दिए बिना 16 दिसंबर 2022 की सहमति डिक्री के पंजीकरण की अनुमति देने की मांग की थी।
मामला एक दुकान और उससे लगी रेस्तरां की जगह से संबंधित uw। दुकान की बिक्री के लिए हुए समझौते के बाद पक्षों के बीच विवाद पैदा हुआ और मुकदमा दायर किया गया। मुकदमे के लंबित रहने के दौरान पक्षकारों के बीच 13 दिसंबर 2022 को सहमति की शर्तें तय हुईं। इसके आधार पर सहमति डिक्री पारित की गई।
जब याचिकाकर्ताओं ने सहमति डिक्री के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की तो उनसे हाउसिंग सोसायटी की NOC मांगी गई। इस पर याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि कानून में सोसायटी की NOC को डिक्री के पंजीकरण की अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्व अधिकारियों को कोर्ट की डिक्री के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए और उसके क्रियान्वयन में सहयोग करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर को पंजीकरण के लिए निर्धारित हस्तांतरण शुल्क की जानकारी देनी चाहिए, लेकिन उन्होंने इसके बजाय सोसायटी की NOC पर जोर दिया, जबकि कानून में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं थी।
खंडपीठ ने कहा कि प्रतिवादी ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान, नियम, विनियम या अधिसूचना पेश नहीं कर सके, जिसके तहत सहमति डिक्री के पंजीकरण से पहले हाउसिंग सोसायटी की एनओसी लेना जरूरी हो। ऐसे में कलेक्टर का रवैया कानूनी रूप से बाध्यकारी डिक्री के क्रियान्वयन में बाधा डालने वाला था।
हाईकोर्ट ने पंजीकरण अधिनियम की धारा 23 के तहत उठाई गई आपत्ति को भी खारिज किया। कोर्ट ने घटनाक्रम की समय-सीमा पर गौर करते हुए कहा कि इस प्रावधान के तहत निर्धारित अवधि का पालन किया गया था।
इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की और कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह 22 अगस्त 2024 के आवेदन पर हाउसिंग सोसायटी की NOC पर जोर दिए बिना कानून के अनुसार फैसला करें।