महाराष्ट्र में SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने पर रोक से बॉम्बे हाईकोर्ट का इनकार, कहा- सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने पर रोक लगाने का मौखिक अनुरोध सोमवार को खारिज किया। हाईकोर्ट ने कहा कि SIR से जुड़े मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले से विचार कर रहा है और न्यायिक मर्यादा का पालन करते हुए हाईकोर्ट समानांतर कार्यवाही नहीं करेगा।
चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले साल नवंबर में सभी हाईकोर्ट को SIR की वैधता या इस प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करने से रोकने संबंधी निर्देश दिए जाने की जानकारी उसे दी गई।
चीफ जस्टिस ने कहा,
“पहले से रोक संबंधी आदेश मौजूद हैं। समानांतर मुकदमेबाजी का कोई उद्देश्य नहीं है। पहले सुप्रीम कोर्ट को मामले पर सुनवाई करने दीजिए उसके बाद हम इस पर विचार करेंगे।”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रकाश आंबेडकर ने इसके बाद आग्रह किया कि कम-से-कम अंतरिम तौर पर हाईकोर्ट ऐसा आदेश जारी कर दे कि मतदाता सूची से किसी का नाम हटाया न जाए। बेंच ने इस मौखिक अनुरोध को भी ठुकरा दिया।
जजों ने स्पष्ट किया,
“नहीं, नहीं, नहीं, हम ऐसा कोई आदेश जारी नहीं करने जा रहे हैं। हम न्यायिक मर्यादा का पालन करेंगे।”
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित की।
याचिका में महाराष्ट्र में SIR को लागू करने के तरीके में कथित खामियों को उठाया गया। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने SIR को रोकने की मांग नहीं की। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में यह प्रक्रिया किस आदेश और दर्ज कारणों के आधार पर शुरू की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही SIR की कार्यप्रणाली और उसके कानूनी आधार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई।
याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग सीमित स्तर पर मतदाता सूची का चुनावी आकलन कर सकता है लेकिन वह निर्णायक रूप से किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं कर सकता। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह बना रहता है तो मामला नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाना चाहिए और मतदाता के चुनावी अधिकार से जुड़ा फैसला उसी प्राधिकारी के निर्णय के अनुरूप होना चाहिए।
याचिका में पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किए जाने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय लागू करने और हटाए गए नामों को बहाल करने की व्यवस्था की भी मांग की गई।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के लिए चुनाव आयोग के निर्देशों में गणना के दौरान दस्तावेज जमा कराने की अनुमति नहीं होने के बावजूद बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त करते समय समर्थन दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। याचिका में इसे SIR के निर्धारित तरीके से अलग बताया गया।
याचिका में कहा गया कि उसका उद्देश्य SIR को रोकना या चुनाव आयोग के कार्यक्रम में बाधा डालना नहीं है बल्कि इसकी वैधता, कार्यप्रणाली और कानूनी आधार को पारदर्शी बनाना तथा यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर न किया जाए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़े व्यापक मुद्दे पर मामला विचाराधीन होने के कारण बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार किया और सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित की।