बाबा सिद्दीकी हत्याकांड : बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार, कहा- सह-आरोपी का कबूलनामा भी साक्ष्य

Update: 2026-05-08 06:56 GMT

पूर्व महाराष्ट्र मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत सह-आरोपी का कबूलनामा भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य है और प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है।

जस्टिस रविंद्र जोशी ने आरोपी चेतन परधी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से यह संकेत मिलता है कि वह उस संगठित गिरोह का सदस्य था, जिसने बाबा सिद्दीकी की हत्या की साजिश रची थी।

मामला 12 अक्टूबर, 2024 का है, जब मुंबई के बांद्रा इलाके में बाबा सिद्दीकी पर उस समय गोलीबारी की गई, जब वह अपने बेटे जीशान सिद्दीकी से मुलाकात के बाद कार में बैठने जा रहे थे। हमलावरों ने उन पर कई गोलियां चलाईं, जिनमें से कुछ उनके सीने और पेट में लगीं। बाद में उनकी मौत हो गई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि हत्या की साजिश लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने रची थी।

अदालत ने कहा कि सह-आरोपी के बयान में चेतन परधी का नाम स्पष्ट रूप से सामने आया और यह भी बताया गया कि उसे हत्या की साजिश की जानकारी थी।

अदालत ने कहा,

“जब आरोपी को यह जानकारी थी कि संबंधित व्यक्ति हत्या करने आया है, तब उसे उससे दूरी बना लेनी चाहिए थी। इसके विपरीत रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि वह सह-आरोपियों के संपर्क में बना रहा।”

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) आरोपी के खिलाफ महत्वपूर्ण परिस्थिति है। अदालत ने कहा कि MCOCA की धारा 21(4) के तहत जमानत तभी दी जा सकती है, जब अदालत को यह संतोष हो कि आरोपी ने अपराध नहीं किया और रिहा होने पर वह दोबारा अपराध नहीं करेगा।

अदालत ने कहा कि इस मामले में ऐसे संतोष का कोई आधार नहीं बनता।

आदेश में कहा गया,

“रिकॉर्ड पर उपलब्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्यों और आरोपी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए अदालत जमानत देने के लिए आवश्यक शर्तों से संतुष्ट नहीं है।”

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया और अभियोजन केवल सह-आरोपियों के कबूलनामे तथा कॉल रिकॉर्ड पर निर्भर है। यह भी कहा गया कि परिचय होने के कारण फोन पर बातचीत होना स्वाभाविक है।

हालांकि, अदालत ने अभियोजन और बाबा सिद्दीकी की पत्नी की ओर से रखे गए तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि MCOCA के तहत दर्ज सह-आरोपी का कबूलनामा अन्य आरोपियों के खिलाफ भी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने चेतन परधी की जमानत याचिका खारिज की।

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