राहुल गांधी की नागरिकता विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने से किया इनकार, FIR की मांग पर सुनवाई जारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वह आरोपों की सच्चाई की जांच नहीं करेगा और न ही गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड की पड़ताल करेगा।
यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें लखनऊ ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार किया गया था।
याचिकाकर्ता एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उसने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ब्रिटिश नागरिकता ली थी और इस संबंध में विभिन्न कानूनों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग के अधिकारी 2019 में जारी नोटिस से संबंधित रिकॉर्ड लेकर अदालत में मौजूद थे। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इन दस्तावेजों की जांच नहीं करेगी।
अदालत ने कहा,
“यह न्यायालय आरोपों की सत्यता की जांच करने का प्रस्ताव नहीं करता है और न ही प्रस्तुत रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा।”
गौरतलब है कि इससे पहले एक अन्य पीठ ने इन रिकॉर्ड को देख लिया था और बाद में उन्हें वापस कर दिया था।
मामले की पृष्ठभूमि 2015 की एक शिकायत है, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटेन की नागरिकता रखने का आरोप लगाया गया। इसके आधार पर गृह मंत्रालय ने 2019 में उनसे स्पष्टीकरण मांगा था।
हालांकि, लखनऊ कोर्ट ने इस वर्ष जनवरी में FIR दर्ज करने की मांग खारिज की थी, जिसके खिलाफ अब हाइकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई जारी रखते हुए अगली तारीख 15 अप्रैल तय की।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह इस स्तर पर आरोपों की गहराई में जाने के बजाय केवल कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।