पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों और बिजली बैकअप सुविधाओं के काम न करने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी कहा- यह SPs की ड्यूटी में लापरवाही

Update: 2026-08-03 04:22 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों और बैकअप बिजली सुविधाओं (जैसे जनरेटर सेट और सोलर पैनल) का काम न करना, पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा "ड्यूटी निभाने में लापरवाही" के बराबर है।

बेंच ने आगे कहा कि यह SP या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की मुख्य जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पुलिस स्टेशन इन ज़रूरी सुविधाओं से पूरी तरह लैस रहें।

पुलिस स्टेशन को "संवेदनशील जगह" मानते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे सभी SPs, SSPs और पुलिस कमिश्नरों को ज़रूरी निर्देश जारी करें। ये निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए हों कि राज्य के सभी जिलों में पुलिस स्टेशन अनुशासन और सही कामकाज के लिए दी गई "सभी सुविधाओं से अच्छी तरह लैस" रहें।

कोर्ट ने यह निर्देश एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए, जिसमें आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता को देवरिया के भलुअनी पुलिस स्टेशन के लॉक-अप में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया।

पिछली सुनवाइयों के दौरान, स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) ने कोर्ट को बताया कि संबंधित तारीख की CCTV फुटेज की पुष्टि नहीं की जा सकी क्योंकि बिजली की सप्लाई नहीं थी और पुलिस स्टेशन का जनरेटर सेट काम नहीं कर रहा था।

इस स्पष्टीकरण पर गंभीरता से ध्यान देते हुए कोर्ट ने CCTV हार्ड डिस्क को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया और बिजली निगम से बिजली सप्लाई का विवरण मांगा। कोर्ट ने देवरिया के SP से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा था, जिसमें यह बताया जाए कि जनरेटर सेट की मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।

जब 28 जुलाई को मामले पर सुनवाई हुई तो एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने कोर्ट को बताया कि हालांकि संबंधित तारीख को गांव में निर्धारित बिजली सप्लाई 18 घंटे की थी, लेकिन असल में सप्लाई केवल 13 घंटे 4 मिनट तक ही उपलब्ध थी।

कोर्ट ने यह भी पाया कि स्टेशन हाउस ऑफिसर हार्ड डिस्क में स्टोर CCTV फुटेज की स्थिति के बारे में संतोषजनक ढंग से नहीं बता पाए, और निर्देश दिया कि फुटेज को निकालकर पेन ड्राइव में कोर्ट के सामने पेश किया जाए।

इसके बाद बेंच ने ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती के दौरान बैकअप देने के लिए पुलिस स्टेशन में लगाए गए जनरेटर सेट और सोलर पैनल के रखरखाव न होने पर अपनी 'नाराजगी' ज़ाहिर की। देवरिया के पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा दाखिल हलफनामे से पता चला कि जनरेटर सेट दिसंबर 2024 से खराब पड़ा था और सोलर पैनल भी काम नहीं कर रहे थे।

इसके बावजूद, बेंच ने गौर किया कि पुलिस स्टेशन की ओर से सोलर पैनल के रखरखाव या जनरेटर सेट की मरम्मत के लिए कोई सूचना नहीं दी गई।

SHO के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि हालांकि वे 31 अगस्त 2025 से पुलिस स्टेशन में तैनात थे, लेकिन वे यह नहीं बता पाए कि उन्होंने न तो खराबी की सूचना क्यों दी और न ही जनरेटर की मरम्मत या सोलर पैनल के रखरखाव के लिए कोई कोशिश क्यों की।

हालांकि, अधिकारी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जनरेटर सेट की मरम्मत 3-4 दिनों के भीतर कर दी जाएगी।

पुलिस स्टेशनों में बिना रुकावट बिजली सप्लाई के महत्व पर ज़ोर देते हुए खासकर ग्रामीण इलाकों में जहाँ बिजली कटौती आम बात है, कोर्ट ने कहा:

"पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की यह प्राथमिक ज़िम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि अलग-अलग पुलिस स्टेशनों को दिए गए जनरेटर सेट चालू हालत में हों और CCTV कैमरों को भी जनरेटर सेट और सोलर पैनल जैसे बैकअप ज़रीये से बिजली सप्लाई मिले। अगर अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं और जेन-सेट व सोलर पैनल जैसे बिजली बैकअप के साधन काम नहीं कर रहे हैं, तो यह पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही है।"

बेंच ने आगे कहा कि जेन-सेट की मरम्मत न करवाने और सोलर पैनल का रखरखाव न करवाने के लिए SHO भी इस मामले में बराबर के ज़िम्मेदार हैं।

सुनवाई के दौरान, एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी एक पत्र भी पेश किया, जिसमें स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के व्यवहार को "कर्तव्यों के निर्वहन और अनुशासन में गंभीर लापरवाही" माना गया और शुरुआती जांच के निर्देश दिए गए।

इस बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने उम्मीद जताई कि पुलिस अधीक्षक इस मामले में तुरंत "ठोस कार्रवाई" करेंगे।

कोर्ट ने अब देवरिया के पुलिस अधीक्षक को अगली सुनवाई की तारीख (11 अगस्त) पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने और ज़िले भर के पुलिस स्टेशनों में जनरेटर सेट, सोलर पैनल और CCTV कैमरों की स्थिति के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया।

स्टेशन हाउस ऑफिसर को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया गया।

Case - Nagendra Kumar Yaqdav vs. State Of U.P. And 3 Others 2026 LiveLaw (AB) 511

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