पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, झूठे हलफनामे देने पर लगाया 15 लाख रुपये का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर 15 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया। अदालत ने पाया कि पति ने अपनी आय छिपाने और खुद को बेरोजगार बताने के लिए झूठे हलफनामे दाखिल किए।
जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि पति की याचिका में कोई सच्चाई नहीं है और वह अदालत की निगरानी अधिकार का लाभ पाने के योग्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिका को खारिज किया जाता है और 15 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि छह सप्ताह के भीतर पत्नी को दी जाए।
मामले में पति ने दावा किया था कि वह बेरोजगार है और पत्नी हाइकोर्ट में कार्यरत है। वह उसी की आय पर निर्भर है। उसने पत्नी पर क्रूरता के आरोप भी लगाए और कहा कि उसके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए।
हालांकि, पत्नी की ओर से पेश किए गए तथ्यों ने पति के दावों को गलत साबित कर दिया। बताया गया कि पति वकालत से जुड़ा हुआ है और निर्माण कार्य के व्यवसाय में भी सक्रिय है। इसके अलावा वह ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है।
अदालत ने यह भी पाया कि पति ने पत्नी को दो बार ऋण लेने के लिए मजबूर किया और वह रकम खुद ले ली। इन ऋणों की कुल राशि 25 लाख रुपये से अधिक है, जिसे पत्नी अब भी अपनी तनख्वाह से चुका रही है। आरोप यह भी सामने आया कि पति पत्नी के आभूषण और गाड़ी लेकर चला गया, जो उसने अपने पैसे से खरीदी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त सहायक वकील ने भी बताया कि पति अदालतों को गुमराह करने के लिए बार-बार झूठे हलफनामे देता रहा है।
अदालत ने कहा,
“वैवाहिक संबंधों में आर्थिक शोषण कई रूपों में सामने आता है आय पर नियंत्रण, संपत्ति पर जबरन कब्जा और आर्थिक स्वतंत्रता को खत्म करना। ऐसे मामलों में केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई पर्याप्त नहीं होती।”
अदालत ने यह भी सख्त टिप्पणी की कि हाइकोर्ट मौका तलाशने का मंच नहीं है और याचिकाकर्ता ने कई बार गलत तथ्यों के साथ अदालत का रुख किया।
फैसले में अदालत ने कहा कि विवाह किसी एक पक्ष के शोषण का साधन नहीं हो सकता बल्कि यह पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी पर आधारित संबंध है। अदालत ने जोर दिया कि ऐसे मामलों में क्षतिपूर्ति का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना भी होना चाहिए।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज करते हुए उस पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसका भुगतान पत्नी को किया जाएगा।