लंबे समय तक आउटसोर्सिंग से भर्ती टालना अनुचित: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने राज्य को लगाई फटकार

Update: 2026-03-23 11:20 GMT

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सरकारी संस्थानों द्वारा नियमित नियुक्तियों को दरकिनार कर लंबे समय तक आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लेने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने इसे शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाला बताया।

जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने बरेली नगर निगम को निर्देश दिया कि 13 वर्षों से आउटसोर्स आधार पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर के नियमितीकरण पर पुनर्विचार किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है और उसका कार्य विभाग के लिए आवश्यक और स्थायी प्रकृति का है तो उसे आउटसोर्सिंग के जरिए रखना शोषणकारी व्यवस्था का संकेत है।

अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय होता है, बल्कि सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया को भी नजरअंदाज करती है।

मामले में याचिकाकर्ता 2011 से नगर निगम में कार्यरत था। पहले उसे दैनिक वेतन पर रखा गया, बाद में उसकी सेवाएं एक ठेकेदार के माध्यम से जारी रखी गईं। 13 साल से अधिक समय तक लगातार काम करने के बावजूद उसके नियमितीकरण का आवेदन खारिज कर दिया गया।

हाइकोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता होता है और उसका कर्तव्य है कि वह कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करे, न कि उनका शोषण करे।

अदालत ने यह भी कहा कि जब किसी विभाग में काम स्थायी रूप से बढ़ता है तो सरकार को स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए, न कि आउटसोर्सिंग के जरिए काम चलाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि लंबे समय तक अस्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारी उम्र सीमा पार कर जाते हैं। बाद में नियमित भर्ती में भाग लेने का अवसर भी खो देते हैं।

इन सभी पहलुओं को देखते हुए हाइकोर्ट ने नगर आयुक्त का आदेश रद्द किया और संबंधित प्राधिकरण को चार महीने के भीतर याचिकाकर्ता के नियमितीकरण पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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