बलात्कार की कोशिश के बीच हुई हत्या: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा बदली, उम्रकैद हटाकर दी राहत

Update: 2026-04-24 12:41 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसले में चार आरोपियों की सजा में बदलाव करते हुए हत्या के अपराध को कम गंभीर अपराध में बदल दिया। अदालत ने कहा कि घटना अचानक हुई थी और पूर्व नियोजित नहीं थी, इसलिए इसे हत्या नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या माना जाएगा।

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पाया कि मृतक द्वारा आरोपियों की बेटी/बहन के साथ बलात्कार का प्रयास किए जाने के दौरान यह घटना हुई थी। इस आधार पर अदालत ने उम्रकैद की सजा को घटाकर उतनी अवधि तक सीमित कर दिया जितनी सजा आरोपी पहले ही काट चुके हैं।

मामले के अनुसार वर्ष 2016 में मृतक की हत्या आरोपियों के घर पर हुई थी। अभियोजन का दावा था कि पैसों के विवाद को लेकर आरोपियों ने उसे बुलाकर गोली मारी और धारदार हथियार से हमला किया।

वहीं आरोपियों का कहना था कि मृतक ने उनकी बेटी को जबरन पकड़कर कमरे में ले जाकर बलात्कार का प्रयास किया। उसकी चीख सुनकर परिवार के सदस्य पहुंचे और अचानक हुए झगड़े में यह घटना हो गई।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से अचानक हुए विवाद और आवेश में हुई घटना है।

अदालत ने टिप्पणी की,

“यह घटना अचानक झगड़े और आवेश में हुई, जिससे यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपियों ने पहले से हत्या की योजना बनाई थी।”

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों ने कोई विशेष क्रूरता नहीं दिखाई और न ही किसी प्रकार का अनुचित लाभ उठाया। अदालत ने कहा कि यदि हत्या की पूर्व योजना होती तो घटना इस तरह उनके अपने घर में नहीं होती

इन्हीं आधारों पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दी गई सजा को बदलकर धारा 304 (भाग-1) के तहत कर दिया।

अंततः हाईकोर्ट ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आरोपियों को पहले से काटी गई सजा के आधार पर रिहाई का आदेश दिया।

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