NCLT इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच केवल स्थानीय रजिस्ट्री करेगी: हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल बेंच का 'संयुक्त स्क्रूटनी' आदेश स्थगित किया

Update: 2026-05-01 09:15 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCLT प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के उस आदेश/अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं एवं आवेदनों की संयुक्त जांच (स्क्रूटनी) इलाहाबाद और प्रिंसिपल बेंच दोनों द्वारा किए जाने का प्रावधान किया गया।

जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए अंतरिम आदेश पारित किया कि फिलहाल NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं/आवेदनों की जांच केवल NCLT इलाहाबाद की रजिस्ट्री ही करेगी।

यह याचिका कंपनी लॉ बार एसोसिएशन द्वारा दायर की गई, जिसमें 27 फरवरी 2026 की सार्वजनिक सूचना को चुनौती दी गई। उक्त सूचना के माध्यम से NCLT प्रिंसिपल बेंच के रजिस्ट्रार ने निर्देश दिया कि NCLT इलाहाबाद में दायर मामलों की जांच अब प्रिंसिपल बेंच और इलाहाबाद बेंच संयुक्त रूप से करेंगी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इस व्यवस्था के कारण भौतिक प्रतियां इलाहाबाद में जमा की जा रही थीं जबकि ऑनलाइन फाइलिंग प्रिंसिपल बेंच के माध्यम से हो रही थी।

आरोप लगाया गया कि फरवरी से प्रिंसिपल बेंच की रजिस्ट्री याचिकाओं में त्रुटियां दूर नहीं कर रही और लगातार तुच्छ आपत्तियां लगा रही है।

यह भी कहा गया कि आदेश में केवल NCLT इलाहाबाद को अलग से निशाना बनाया गया।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि बार की शिकायतों के आधार पर स्क्रूटनी का कार्य प्रिंसिपल बेंच को सौंपा गया।

इस पर हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि यदि बार के कुछ सदस्यों के अनुरोध पर ऐसा निर्णय लिया गया तो यह अधिकरण की स्थापना के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देगा।

अदालत ने कहा,

“ऐसी कार्रवाई से विभिन्न बेंचों की स्थापना का उद्देश्य प्रभावित होगा और संबंधित क्षेत्राधिकार के वादकारी या तो न्याय से वंचित हो सकते हैं या न्याय वितरण में विलंब का सामना कर सकते हैं।”

इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने विवादित अधिसूचना पर रोक लगाते हुए पक्षकारों को हलफनामों का आदान-प्रदान करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई 21 मई, 2026 को होगी।

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