ससुर से वसूली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक, विधवा बहू के भरण-पोषण बकाया विवाद में अंतरिम राहत

Update: 2026-04-23 12:31 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण मामले में ससुर के खिलाफ जारी वसूली वारंट पर रोक लगाई। यह मामला मृत पति के जीवनकाल के दौरान बकाया भरण-पोषण राशि को लेकर विधवा बहू द्वारा की गई वसूली से जुड़ा है।

जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए ससुर को राहत दी। हालांकि अदालत ने शर्त रखी कि वह विवादित राशि का आधा हिस्सा निचली अदालत में जमा करेंगे, तभी यह रोक प्रभावी रहेगी।

मामले के अनुसार, वर्ष 2016 में विधवा बहू ने अपने पति के जीवित रहते हुए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग की थी। इस पर उसे अंतरिम रूप से प्रति माह 3000 रुपये देने का आदेश दिया गया। हालांकि, नवंबर, 2023 में पति की मृत्यु हो गई।

इसके बाद महिला ने ससुर से भरण-पोषण की मांग करते हुए नया मामला दायर किया, जिसे पारिवारिक अदालत ने अगस्त, 2024 में खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वह ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है।

इसके बावजूद महिला ने पति के जीवित रहने के दौरान की बकाया राशि 1,16,000 रुपये की वसूली के लिए एक और याचिका दायर की। इस पर मार्च 2025 में आदेश पारित हुआ और मार्च 2026 में ससुर के खिलाफ वसूली वारंट जारी कर दिया गया।

ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश दिया कि यदि पति जीवित होता तो पत्नी उसके चल-अचल संपत्ति की पूर्ण स्वामिनी होती इसलिए बकाया राशि की वसूली उचित है।

इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। ससुर की ओर से दलील दी गई कि बहू बेरोजगार नहीं है, बल्कि वह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में अनुबंध पर कार्यरत है। साथ ही यह भी कहा गया कि मृतक पति ने कोई संपत्ति नहीं छोड़ी है।

इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने महिला को जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी किया। साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई को निर्धारित करते हुए वसूली वारंट पर फिलहाल रोक लगाई, बशर्ते ससुर तीन सप्ताह के भीतर आधी राशि जमा कर दें।

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