ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिव लिंग की पूजा के अप्रतिबंधित अधिकार की मांग वाली याचिका पर 8 सप्ताह में फैसला करें: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वाराणसी कोर्ट से कहा

Update: 2024-03-04 11:00 GMT

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वाराणसी में सिविल जज, (सीनियर डिवीजन) की अदालत को मई 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर कथित तौर पर पाए गए शिव लिंग की पूजा करने के अप्रतिबंधित अधिकार की मांग वाली याचिका को 8 सप्ताह में निपटाने का निर्देश दिया।

जस्टिस मनीष कुमार निगम की पीठ ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत विवेक सोनी और अन्य द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका का शीघ्र निपटारा करने का अनुरोध करते हुए हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाइकोर्ट के समक्ष उन्होंने तर्क दिया कि उनकी याचिका में प्रतिवादियों (मस्जिद प्रबंधन) के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई। इसका उद्देश्य भोग प्रसाद शयन आरती, मंगला आरती, माला, दुग्ध अभिषेक, कीर्तन, आदि की पेशकश में किसी भी हस्तक्षेप को रोकना था। 2022 से लंबित होने के बावजूद वाराणसी कोर्ट द्वारा शिव लिंग पर निर्णय नहीं लिया जा रहा था।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिव लिंग की मौजूदगी के बारे में दावे 16 मई को प्रमुखता से किए गए, जब अदालत द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर ने प्रस्तुत किया कि उन्हें वज़ूखाना क्षेत्र (वज़ूखाना - चेहरा, हाथ और पैर धोने का स्थान) में शिव लिंग मिला था। इसके अनुपालन में जिला न्यायालय ने संबंधित स्थान/क्षेत्र को सील करने का आदेश दिया। मस्जिद समिति ने दावा किया है कि उक्त शिव लिंग फव्वारा है।

एकल न्यायाधीश ने याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया,

“वर्तमान याचिका का अंतिम रूप से निपटारा सिविल जज (सीनियर डिवीजन) वाराणसी को अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन (6सी आवेदन) पर कानून के अनुसार शीघ्रता से अधिमानतः आठ सप्ताह की अवधि के भीतर विचार करने और निर्णय लेने के निर्देश के साथ किया जाता है। एकल न्यायाधीश ने याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद और किसी भी पक्ष को अनावश्यक स्थगन दिए बिना बशर्ते कि कोई अन्य कानूनी बाधा न हो इस आदेश की प्रमाणित प्रति पेश करने की तारीख तय की जाए।”

केस टाइटल - विवेक सोनी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और 4 अन्य

केस साइटेशन- लाइव लॉ (एबी) 130 2024

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