पत्रकारिता करने से शिक्षक की नौकरी पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा संस्थानों में शिक्षक नियुक्ति या सेवा के लिए पत्रकारिता में संलिप्त होना कोई बाधा नहीं है। अदालत ने कहा कि लागू नियमों में ऐसी कोई मनाही नहीं है।
जस्टिस इरशाद अली ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर लागू नहीं होती। उनके सेवा नियम उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियम 1981 द्वारा संचालित होते हैं, जिनमें पत्रकारिता करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
मामला एक सहायक शिक्षक से जुड़ा था, जिन्हें यह आरोप लगने पर निलंबित किया गया कि वे एक समाचार पत्र में पत्रकारिता कर रहे हैं। बाद में उन्हें जूनियर बेसिक स्कूल से प्राथमिक विद्यालय में पदावनत कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने पाया कि कारण बताओ नोटिस के बाद शिक्षक को न तो सुनवाई का उचित अवसर दिया गया और न ही गवाहों से क्रॉस एग्जामिनेशन का मौका मिला जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
अदालत ने कहा कि केवल पत्रकारिता में संलिप्त होने के आधार पर ऐसी कार्रवाई उचित नहीं है, क्योंकि 1981 के नियमों में इस पर कोई रोक नहीं है।
हालांकि, याचिकाकर्ता अब रिटायर हो चुके हैं। इसलिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें सभी सेवा लाभ ऐसे दिए जाएं, मानो वे जूनियर बेसिक स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर ही कार्यरत रहे हों।