क्या बिना नोटिस मस्जिद सील कर सकती है सरकार? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Update: 2026-03-30 05:58 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह किस कानून के तहत किसी मस्जिद को सील कर सकती है और क्या बिना पूर्व नोटिस दिए ऐसा करना वैध है। अदालत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ यह सवाल याचिका की सुनवाई के दौरान उठा रही थी, जिसे एहसान अली ने दाखिल किया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि उसने सितंबर, 2019 में मुजफ्फरनगर जिले के जानसठ तहसील के भोपा गांव में ज़मीन विधिवत रजिस्ट्री के जरिए खरीदी थी। वह इस ज़मीन पर मस्जिद निर्माण के लिए धन जुटा रहा था, लेकिन राज्य के अधिकारियों ने उस स्थल को सील कर दिया।

प्रशासन का कहना है कि निर्माण अवैध है। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली गई। वहीं याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना कोई नोटिस दिए और बिना सुनवाई का अवसर दिए यह कार्रवाई की गई, जो कानून के खिलाफ है।

अदालत ने राज्य सरकार से तीन अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा। पहला, किस कानूनी प्रावधान के तहत किसी धार्मिक स्थल को सील किया जा सकता है। दूसरा, क्या किसी धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए राज्य से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। तीसरा, क्या बिना नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए निर्माणाधीन धार्मिक स्थल को सील करने का कोई कानूनी आधार है।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी सवालों के जवाब शपथपत्र के साथ प्रस्तुत किए जाएं।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि सील की गई संपत्ति को खोला जाए, उसे निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए और कानून के अनुसार वहां नमाज अदा करने की भी इजाजत दी जाए।

मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी।

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