इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर कथित 'X' पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) को लेकर उनके खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी गई। कोर्ट ने फैसले की घोषणा तक गिरफ्तारी पर रोक भी बढ़ा दी।

कोर्ट के समक्ष जुबैर का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनियर वकील दिलीप गुप्ता ने तर्क दिया कि पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ नरसिंहानंद की कथित टिप्पणी को लेकर 4 अक्टूबर की रात को जो विरोध प्रदर्शन हुए, वे सीधे तौर पर नरसिंहानंद के भाषण का नतीजा थे, न कि 'X' पर जुबैर की कथित पोस्ट का।

हिंदी कवि डॉ. कुमार विश्वास द्वारा की गई 'तैमूर टिप्पणी' का जिक्र करते हुए, जिन्होंने हाल ही में एक्टर सैफ अली खान या करीना कपूर खान का सीधे तौर पर नाम लिए बिना अपने बेटे का नाम 'आक्रमणकारी' के नाम पर रखने पर सवाल उठाया था, सीनियर वकील गुप्ता ने तर्क दिया कि हाल ही में एक्टर सैफ अली खान पर उनके मुंबई आवास पर घुसपैठिए द्वारा किए गए हमले के लिए कुमार विश्वास को जिम्मेदार ठहराना दूर की कौड़ी होगी।

इसी तरह उन्होंने दलील दी कि जुबैर को डासना में विरोध प्रदर्शन के लिए सिर्फ इसलिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने नरसिंहानंद की कथित टिप्पणियों के बारे में 'X' पर पोस्ट किया था।

उन्होंने आगे कहा,

“वे (गाजियाबाद में डासना मंदिर के बाहर प्रदर्शनकारी) पैगंबर मोहम्मद के बारे में नरसिंहानंद की कथित टिप्पणियों के कारण एकत्र हुए। एक कवि कुमार विश्वास हैं, जिन्होंने हाल ही में कुछ कहा था - उन्होंने अपनी सभी कथाओं में वह टिप्पणी की है। मैंने सुना है कि उन्होंने हाल ही में अभिनेता सैफ अली खान के बारे में क्या कहा। उसके बाद एक्टर के साथ क्या हुआ। कुमार विश्वास ने कहा कि सैफ अली खान ने अपने बेटे का नाम तैमूर रखा है और उनकी टिप्पणी के बाद एक्टर पर उनके घर पर हमला हुआ। अब क्या मैं यह कहूं कि कुमार विश्वास की टिप्पणी के कारण ऐसा हुआ? यह बहुत दूर की बात होगी।"

गुप्ता ने यह भी तर्क दिया कि मामला केवल उनके मुवक्किल के खिलाफ FIR दर्ज करने के बारे में नहीं, बल्कि यह मामला भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सवाल से भी जुड़ा है।

उल्लेखनीय है कि दोनों पक्षों की दलीलें समाप्त होने के बाद जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राज्य से मौखिक रूप से पूछा कि क्या मामले में आरोप पत्र दाखिल होने तक जुबैर को सुरक्षा दी जानी चाहिए।

इस सुझाव का एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने विरोध किया। एएजी मनीष गोयल ने प्रस्तुत किया कि नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य एलएल 2021 एससी 211 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला जुबैर को ऐसी सुरक्षा देने के रास्ते में आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऑल्ट-न्यूज के सह-संस्थापक को अपनी स्वतंत्रता के बारे में आशंका है तो वे अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

उनका आगे कहना था कि न्यायालय के लिए केवल कुछ धाराओं के तहत FIR रद्द करना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि दिनेशभाई चंदूभाई पटेल बनाम गुजरात राज्य और सोमजीत मलिक बनाम झारखंड राज्य और अन्य 2024 लाइव लॉ (एससी) 797 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर पूरी FIR रद्द करने का मामला भी नहीं बनता।

एएजी गोयल ने स्पष्ट रूप से तर्क दिया कि डासना घटना सीधे तौर पर जुबैर के 'X' पोस्ट की वजह से हुई, क्योंकि उसका अपने 15 लाख फॉलोअर्स पर कुछ प्रभाव है।

एएजी गोयल ने यह भी कहा कि जुबैर का आचरण और इरादा स्पष्ट है:

"FIR में उसके खिलाफ संज्ञेय अपराधों का खुलासा हुआ। याचिकाकर्ता का आचरण और हमारे द्वारा रिकॉर्ड में रखी गई अन्य सामग्री उसकी मन:स्थिति का खुलासा करती है। उसका आचरण और इरादा स्पष्ट है और प्रस्तुत सामग्री उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनाती है। उसने अपने पोस्ट में एक राज्य (महाराष्ट्र का जिक्र करते हुए) के नक्शे को भी विकृत किया।"

सुनवाई के दौरान, खंडपीठ ने जुबैर के वकील (सीनियर एडवोकेट गुप्ता) से संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें उसकी स्वतंत्रता के उल्लंघन के बारे में उसकी आशंका का विवरण हो। खंडपीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट ने तर्क दिया था कि चूंकि जुबैर के खिलाफ धारा 152 BNS (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला अधिनियम) लागू किया गया, इसलिए उसकी स्वतंत्रता खतरे में थी।

बता दें कि जुबैर पर गाजियाबाद पुलिस ने अक्टूबर, 2024 में FIR दर्ज की, जिसमें उन पर विवादित पुजारी यति नरसिंहानंद के एक सहयोगी की शिकायत के बाद धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। जुबैर ने FIR को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके तहत बाद में धारा 152 BNS का अपराध जोड़ा गया।

जुबैर का कहना है कि 3 अक्टूबर को यति नरसिंहानंद के वीडियो की सीरीज पोस्ट करके और बाद में उनके विभिन्न विवादास्पद भाषणों के साथ अन्य ट्वीट साझा करके जुबैर ने नरसिंहानंद के 'भड़काऊ' बयानों को उजागर करने और पुलिस अधिकारियों से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करने का लक्ष्य रखा।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता उदिता त्यागी ने जुबैर पर मुसलमानों द्वारा हिंसा भड़काने के इरादे से यति के पुराने वीडियो क्लिप साझा करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुबैर के ट्वीट के कारण गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए।

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