यूपी में 80% लापता लोग खोजे गए: नई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट, पहले का 'चौंकाने वाला' आंकड़ा गलत तरीके से पेश हुआ

Update: 2026-03-26 09:59 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताजा आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 1 जनवरी 2024 से 17 मार्च 2026 के बीच राज्य में 1,19,070 लोग लापता हुए, जिनमें से 95,061 (करीब 80%) को खोज लिया गया।

जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ इस मामले में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

अदालत ने नए आंकड़ों पर गौर करते हुए कहा कि पहले जो आंकड़े पेश किए गए, वे सही तरीके से अदालत तक नहीं पहुंचे थे।

खंडपीठ ने टिप्पणी की,

“प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि 29.01.2026 के आदेश में जिस आंकड़े का उल्लेख किया गया, उसे सही ढंग से अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।”

सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और अपने-अपने हलफनामों के जरिए जिलेवार आंकड़े अदालत को बताए। इन आंकड़ों में करीब 80 प्रतिशत मामलों में लोगों के मिलने की जानकारी दी गई।

गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में एक अन्य पीठ ने राज्य सरकार के आंकड़ों पर गंभीर नाराजगी जताई थी। उस समय अदालत के सामने जो जानकारी आई, उसके अनुसार 2024 से अब तक करीब 1.08 लाख लापता मामलों में केवल लगभग 9,700 में ही कार्रवाई दर्ज थी। इस पर अदालत ने इसे “चौंकाने वाला” बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

उसी मामले के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की और राज्य सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाए।

अब नए हलफनामे में पुलिस ने कहा कि लापता लोगों को खोजकर सुरक्षित वापस लाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके समर्थन में 2013 से फरवरी, 2026 तक जारी 11 अलग-अलग दिशा-निर्देशों और परिपत्रों का भी उल्लेख किया गया।

राज्य के अधिकारियों ने अदालत को भरोसा दिलाया कि बाकी लापता लोगों को खोजने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

अदालत ने इन हलफनामों को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिकाकर्ताओं के वकीलों को 10 दिन का समय जवाब दाखिल करने के लिए दिया।

मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की गई।

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