इलाहाबाद हाईकोर्ट ने STF की हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के मामले में न्यायिक जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह निर्देश पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर मौत से पहले लगी चोटों (antemortem injuries) का उल्लेख पाए जाने के बाद दिया।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मामले की जांच CBI या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने पाया कि मृतक की मौत STF की हिरासत में हुई थी और परिवार ने आरोप लगाया था कि STF कर्मियों की कथित यातना के कारण उसकी मौत हुई। वहीं, एक SDM जांच में मौत को प्राकृतिक बताते हुए हार्ट अटैक से होने की बात कही गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 176(1-A) के तहत हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि उसके पहले के निर्देश के बावजूद ऐसी न्यायिक जांच नहीं कराई गई।
कोर्ट ने प्रयागराज के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से धारा 176(1-A) के तहत न्यायिक जांच कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें।
जांच को 6 सप्ताह के भीतर पूरा करने और रिपोर्ट अगली सुनवाई, 27 अक्टूबर, को सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया है।