इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एक विधवा के बैंक खाते से काटे गए ₹17,29,999 वापस करने का अंतरिम निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि बैंक मृतक पति के पर्सनल लोन की बकाया राशि की वसूली के लिए विधवा को मिले लाइफ इंश्योरेंस के पैसे से रकम नहीं काट सकता।

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ विधवा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने SBI की कर्नलगंज शाखा, प्रयागराज में अपने सेविंग अकाउंट से की गई कटौती को चुनौती दी थी।

पति की मौत के बाद मिला था ₹50 लाख का इंश्योरेंस

याचिकाकर्ता के पति अंबेश कुमार सिंह कौशांबी के बालापुर, चायल स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक थे। उन्होंने SBI से पर्सनल लोन लिया था। 7 जून 2025 को सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई।

पति की मृत्यु के बाद पत्नी को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से करीब ₹50 लाख प्राप्त हुए। इसके बाद SBI ने उनके खाते से पति के पर्सनल लोन की बकाया राशि के तौर पर ₹17,29,999 काट लिए।

विधवा ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह न तो उस लोन की उधारकर्ता थीं और न ही गारंटर। इसलिए उनके खाते से रकम की वसूली का बैंक के पास कोई अधिकार नहीं था।

SBI ने लोन एग्रीमेंट की शर्त का दिया हवाला

SBI ने लोन एग्रीमेंट की Clause 18(iii) पर भरोसा किया। इस शर्त में बैंक को उधारकर्ता के पैसे, खातों, सिक्योरिटीज और अन्य संपत्तियों पर सेट-ऑफ और जनरल लियन का व्यापक अधिकार दिया गया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि यह क्लॉज "बहुत व्यापक रूप से लिखा गया है", लेकिन प्रथम दृष्टया इससे SBI को विधवा को मिले इंश्योरेंस के पैसे से मृतक के लोन की वसूली का अधिकार नहीं मिलता।

'इंश्योरेंस की रकम मृतक की संपत्ति नहीं'

कोर्ट ने कहा कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की रकम बीमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद देय होती है और संभव है कि वह रकम कभी भी बीमित व्यक्ति की संपत्ति रही ही न हो।

कोर्ट ने टिप्पणी की:

“यह मृतक की रकम या संपत्ति नहीं, बल्कि लाभार्थी की संपत्ति है।”

पीठ ने आगे कहा कि ऐसी इंश्योरेंस राशि मृतक द्वारा अपने उत्तराधिकारियों के लिए छोड़ी गई एस्टेट का हिस्सा नहीं होती, बल्कि यह एक सामाजिक सुरक्षा उपाय या लाभ है, जिसे लाभार्थी अपनी स्वतंत्र हैसियत में प्राप्त करता है।

इसी आधार पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि SBI विधवा के खाते में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा जमा की गई रकम से लोन की वसूली करने का हकदार नहीं था।

SBI को ₹17.29 लाख वापस करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों को दो सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को होगी।

इस बीच, स्टे एप्लीकेशन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने SBI रीजनल ऑफिस, जॉनस्टनगंज, प्रयागराज के सीनियर मैनेजर और SBI कर्नलगंज शाखा के ब्रांच मैनेजर को विधवा के खाते में ₹17,29,999 वापस करने का अंतरिम निर्देश दिया है।

अधिकारियों को या तो रकम वापस करनी होगी या फिर दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने व्यक्तिगत हलफनामे दाखिल कर यह बताना होगा कि इस अंतरिम आदेश को अंतिम क्यों न कर दिया जाए।

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